महगड़ा नवपाषाण काल का पुरास्थल है, जो उत्तर प्रदेश इलाहाबाद जिले की मेजा तहसील के पहाड़ी क्षेत्र में बेलन नदी घाटी के तट पर स्थित है। इसकी खोज सन् १९७५-७६ई. में हुई। यहाँ से पशुबाड़ा का साक्ष्य मिला है। इसके अतिरिक्त गोलाकार झोपड़ियों के प्रमाण चावल मवेशियों के खुर के निशान और बकरी, भेड़, घोड़े, हिरण, जंगली सूअर की हड्डियों के रूप में मवेशी पालने के प्रमाण मिट्टी की सतह पर पाये गये।
Indian History Topic Wise questions
महगड़ा नवपाषाण काल का पुरास्थल है, जो उत्तर प्रदेश इलाहाबाद जिले की मेजा तहसील के पहाड़ी क्षेत्र में बेलन नदी घाटी के तट पर स्थित है। इसकी खोज सन् १९७५-७६ई. में हुई। यहाँ से पशुबाड़ा का साक्ष्य मिला है। इसके अतिरिक्त गोलाकार झोपड़ियों के प्रमाण चावल मवेशियों के खुर के निशान और बकरी, भेड़, घोड़े, हिरण, जंगली सूअर की हड्डियों के रूप में मवेशी पालने के प्रमाण मिट्टी की सतह पर पाये गये।
Q02.प्रारम्भिक मनुष्यों द्वारा उपयोग किये जाने वाले माइक्रोलिथ्स______थे।
माइक्रोलिथ्स पत्थर के औजार (Stone tools) होते है, इनका सम्बन्ध मध्य पाषाण काल से है तथा इन औजारों को निर्माण सामान्य रूप से समान्तर फलकों वाले छोटे ब्लेडों पर क्वार्टजाइट, चर्ट, जैस्पर, अगेट जैसे सिलिका पत्थरों से होता था। जिनकी लम्बाई १ से ५ इंच तक होती है। ये उपकरण वास्तव में छोटे तथा नुकीले होते है और विभिन्न प्रकार की आकृतियों जैसे अर्धचन्द्र, समलम्ब तथा त्रिभुज आदि में पाये गये है। नोट:- भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के तट पर स्थित ‘बागौर’ भारत का सबसे बड़ा मध्यपाषाणिक स्थल है। इसी काल से शवों को दफनाने की प्रथा की शुरुआत मानी जाती है।
Q03.निम्नलिखित में से कौन सा भारत में पुरातात्विक महत्व का एक पुरापाषाण स्थल है।
हुनासागी कर्नाटक राज्य में स्थित एक प्रारम्भिक पुरापाषाण स्थल है। हुनासांगी के पुरापाषाण उपकरण चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, क्वार्टजाइट, डोलोराइट, चर्ट जैसे विविध प्रकार के पत्थरों से बने हैं। • बुर्जहोम (जम्मू-कश्मीर) तथा मेहरगढ़ (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) चिरांद (सारण, बिहार) नव पाषाण कालीन ज्ञात स्थल है।
Q04.सेल्ट एक (celt) नवपाषाणकालीन ______है।
सेल्ट एक (celt) नवपाषाणकालीन एक उपकरण है। पुरापाषाण काल के विपरीत इस अवधि में लोगों ने पॉलिश किए गए पत्थर के औजारों और कुल्हाड़ियों का उपयोग करना शुरू किया, जिन्हें सेल्ट कहा जाता था।
Q05.प्रागैतिहासिक काल के पहले युग को क्या कहा जाता है?
पुरापाषाण काल प्रागैतिहासिक युग का वह समय है जब मानव ने पत्थर के औजार बनाना सबसे पहले आरम्भ किया। यह काल 25 लाख साल पूर्व से लेकर 3000 साल पूर्व तक माना जाता है। इस दौरान मानव इतिहास का 99% विकास हुआ। इस काल के बाद मध्य पाषाण युग का प्रारम्भ हुआ जब मानव ने पशुपालन शुरू किया था। भारत में पुरापाषाण काल के अवशेष तमिलनाडु के पल्लवरम्, बदमदुरै, अतिरमपक्क्म, मध्य प्रदेश के भीमबेटका और छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सिंहावल में भी मिलते है। इस काल को जलवायु परिवर्तन तथा उस समय के पत्थर के हथियारों और औजारों के प्रकारों के आधार पर निम्न तीन भागों में विभाजित किया गया है। 1. निम्न पुरापाषाण काल, 2. मध्य पुरापाषाण काल 3. उच्च पुरापाषण काल
Q06.निम्नलिखित में से किस पुरातात्विक स्थल पर गर्त- आवासों के प्रमाण हैं?
बुर्जहोम पुरातात्विक महत्व वाला जम्मू-कश्मीर राज्य का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। • यहाँ पर कई प्राचीन भूमिगत गर्त-आवास पाए गए हैं। • बुर्जहोम में मालिक के मर जाने पर उसके शव को पालतू कुत्ते के साथ ही दफनाया जाता था।
Q07.बुर्जहोम, नवपाषाणयुगीन स्थल.......... में स्थित है–
बुर्जहोम नवपाषाणयुगीन पुरातात्विक स्थल है जो भारत के जम्मू–कश्मीर राज्य में स्थित है। यहाँ उत्खनन के दौरान गहरे गड्ढे में पत्थर की कुल्हाड़ी, हड्डी के औजार एवं भूरे जले हुए मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए थे।यहाँ प्राप्त कब्र में पालतु कुत्ते को मालिक के साथ दफनाया गया है ।
Q08.मेहरगढ़, नवपाषाण काल की बस्ती, पाकिस्तान के...... प्रांत में स्थित है।
मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण एक स्थान है। जहाँ नवपाषाण युग के बहुत से अवशेष मिले है। यह स्थान वर्तमान में बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में बोलन नदी के किनारे स्थित है। यहाँ प्राचीनतम कृषि एवं पशुपालन से संबंधित साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
Q09.पुरातात्विक स्थल इनामगाँव कहाँ स्थित है?
पुरातात्विक स्थल इनामगाँव भारत के महाराष्ट्र राज्य में स्थित है। यह भीमा नदी की सहायक नदी घोड़ के तट पर स्थित है। यह ताम्र पाषाणिक संस्कृति से जुड़ा स्थल है। इनामगांव के लोगों का मुख्य पेशा कृषि था। जानवरों को दूध और मांस के लिए पाला जाता है।
Q10.पुरातत्व स्थल कोल्डिहवा कहाँ स्थित है?
नव पाषाण काल में सर्वप्रथम खाद्यानों की व्यवस्थित कृषि प्रारम्भ हुई थी तथा मनुष्यों ने जौ, गेहूँ की वन्य किस्मों ंको इस समय मे उपजाया था। भारतीय उपमहाद्वीप में कोल्डिहवा तथा मेहरगढ़ दो नव पाषाण कालीन बस्तिया थी जहाँ से चावल और गेहूँ के स्पष्ट प्रमाण मिले थे। कोल्डिहवा भारत के उत्तर प्रदेश में एक पुरातात्विक स्थल है। उ. प्र. इलाहाबाद (प्रयागराज) में स्थित कोल्डिहवा एक मात्र ऐसा नवपाषाणिक पुरास्थल है जहाँ से 6000 ई. पू. में धान की खेती किये जाने का प्रमाण मिला है। नवीनतम् खोज के नगर जिले के लहुरादेव (8000 B.C.) से प्राप्त हुआ है।
Q11.निम्नलिखित में से किस प्रागैतिहासिक भारतीय स्थल पर ‘होमो इरेक्टस’ मानव की खोपड़ी पाई गई थी?
प्रागैतिहासिक काल मानव सभ्यता के विकास का इतिहास है। जो पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है। हथनोरा मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी में एक गाँव है। इस भारतीय स्थल पर ‘होमो इरेक्टस’ मानव की खोपड़ी पाई गई थी। नर्मदा घाटी के जीवाश्मों में हाथी, घोड़े, दरियाई घोड़ा, जंगली भैसों के जीवाश्म के साथ होशंगाबाद जिले के हथनोरा में 5 दिसम्बर, 1982 को 70 हजार वर्ष पुराने मानव के कपाल अवशेष डॉ. अरुण सोनकिया ने प्राप्त किया था।
बुर्जहोम, जम्मू कश्मीर का पुरातात्विक महत्व का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। बुर्जहोम में नवपाषाण युग की सभ्यता का पता लगा है, बुर्जहोम में जंगली कुत्तो और बारहसिंगो के सींग के अवशेष प्राप्त हुए है।
जोर्वे संस्कृति ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति है। एम. एन. देश पाण्डे ने इस संस्कृति की खोज की थी। ‘जोर्वे’ महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर जिले में गोदावरी नदी की सहायक नदी ‘प्रवरा’ के तट पर स्थित एक गाँव एवं पुरातात्विक स्थल है। जहाँ पर जोर्वे संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं। जोर्वे संस्कृति प्रमुख रुप से पश्चिमी महाराष्ट्र में विकसित हुई। जोर्वे संस्कृति के प्रमुख स्थल हैं- चन्दोली, सोनगाँव, इमामगाँव, जोर्वे, नासिक तथा दायमाबाद आदि। जोर्वे संस्कृति का समय काल 1400 ई.पू. से 700 ई.पू. तक माना जाता है।
Q14.जम्मू-कश्मीर में पुरातात्विक महत्व का स्थल निम्नलिखित में से कौन सा है?
पुरातात्विक स्थल बुर्जहोम जम्मू-कश्मीर में स्थित था, सन् १९३५ में डी. टेरा तथा पीटरसन द्वारा इस स्थल की खोज की गई। यहाँ से गर्तावास एवं एक कब्र से मालिक के साथ पालतू कुत्ते दफनाए जाने का साक्ष्य मिला है, इसके अतिरिक्त छिद्र युक्त सूर्य, हड्डी का तीराग्र छिद्र युक्त हार्वेस्टर, गेहूँ व जौ। विभिन्न प्रकार के मृदभाण्ड पत्थर हड्डी के औजार मिले हैं।
A–4,B–1C–3,D–2 नगर प्राप्त साक्ष्य मोहनजोदड़ो स्नानागार (ग्रेट बाथ) हड़प्पा स्टैच्यू ऑफ प्रीस्ट (पुजारी की प्रतिमा) कालीबंगा हल का चिन्ह लोथल पत्तन नगर
Q16.हड़प्पा सभ्यता का निम्नलिखित में से कौन सा स्थल अफगानिस्तान में स्थित है?
हड़प्पा सभ्यता का पुरास्थल शोर्तुघई और मुंडीगाक दोनों ही अफगानिस्तान में स्थित है। शोर्तुघई उत्तरी अफगानिस्तान में कोकचा और ऑक्सस नदी के संगम क्षेत्र में स्थित है।
Q17.मोहनजोदड़ों में मिले ‘महास्नानागार’ को –––––– की परत चढ़ाकर जलरोधी बनाया गया था।
मोहनजोदड़ों वर्तमान पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में आता है। मोहनजोदड़ों से प्राप्त स्थापत्य कला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण दुर्ग में अवस्थित वृहद स्नानागार है। उत्तर से दक्षिण की ओर इसकी लम्बाई ११.८९ मीटर तथा पूर्व से पश्चिम की ओर इसकी चौडाई ७ मीटर है। इसकी गहराई २.४४ मीटर है। नीचे तक पहुँचने के लिए इसमें पकी हुई पतली ईंटो से निर्मित सीढ़ियाँ बनाई गई हैं। इसमें जल भरने तथा निकालने के लिए नालियों की व्यवस्था थी। इसको प्राकृतिक चारकोल की परत चढ़ाकर जलरोधी बनाया गया था।
Q18.लगभग 2500 साल पहले सिंधु नदी को ईरानियों द्वारा –––––कहा जाता था।
सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट चेम युन्ग डुंग ग्लेशियर से निकलकर भारत में केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के दो जिलों लेह एवं कारगिल में प्रवेश करती है। झेलम, चिनाब, रावी, व्यास तथा सतलुज इसकी पांच महत्वपूर्ण सहायक नदियां है। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में यह नदी ‘सिन्धु’ नाम से वर्णित है तथा लगभग २५०० वर्ष पहले ईरान के लोग इसे हेंदु (Hendu), यूनानी ग्रीक के लोग इंडोस तथा रोमन लोग इंडस (Indus) कहते थे।
Q19.दैमाबाद नामक प्रागैतिहासिक स्थल निम्न में से किस राज्य में स्थित है?
दैमाबाद नामक प्रागैतिहासिक स्थल महाराष्ट्र राज्य में स्थित है। यह स्थल गोदावरी की सहायक नदी ‘प्रवरा नदी के बाएँ तट पर स्थित है। इस स्थल की खोज बी.पी. बोपर्दिकर द्वारा की गयी थी।
Q20.हड़प्पा सभ्यता के निम्नलिखित स्थलों में से कौन सा स्थल पाकिस्तान में स्थित नहीं है?
हड़प्पा सभ्यता लगभग 2350 ईस्वी पूर्व दक्षिण एशिया के पश्चिमी भाग में फैली हुई थी, जो कि वर्तमान में पाकिस्तान तथा पश्चिमी भारत के नाम से जाना जाता है। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा किये गये सिंधु घाटी के उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो जैसे दो प्राचीन नगरों की खोज हुई। ध्यातव्य है कि कोटदीजी, बालाकोट, चन्हूदड़ो, नामक हड़प्पा स्थल पाकिस्तान में स्थित है जबकि शोरतुगई (शोर्तुघई) अफगानिस्तान में स्थित है।
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