Concept note कोशिका विभाजन तीन प्रकार से होता है। असूत्री विभाजन (Aस्ग्ूदेग्े) सूत्री विभाजन (श्ग्ूदेग्े) तथा अर्द्धसूत्री विभाजन (शग्देग्े)। सूत्री विभाजन (श्ग्ूदेग्े) की खोज वाल्थेर फ्लेमिंग ने 1882 ई. में किया था। विभाजन प्रावस्था में केंद्रक में अनेक शृंखलाबद्ध परिवर्तन होते हैं, जिनको चार प्रावस्थाओं में बाँटा गया है, यथा- 1. प्रोफेज:- केंद्रक कला एवं केंद्रिका का लुप्त होना, स्पिण्डल फाईबर का निर्माण एवं क्रोमैटिड्स का दृष्टिगोचर होना इस अवस्था के लक्षण हैं। 2. मेटाफेज:- क्रोमैटिड्स का मेटाफेज प्लेट्स पर सेन्ट्रोमियर से जुड़ना। 3. एनाफेज:- क्रोमैटिड्स का विभाजन होना। 4. टीलोफेज:- केन्द्रिका एवं केन्द्रक कला का प्रकटीकरण और दो केंद्रक का निर्माण होना।
Concept note लाइसोसोम की खोज क्रिश्चियन डी. ड्यूव ने 1959 में की थी। यह एक सूक्ष्म कोशिकांग है। इसका आकार थैली की तरह होता है इसमें ऐसे एंजाइम होते हैं। जिनमें जीव द्रव्य को घुला देने या नष्ट कर देने की क्षमता होती है। कोशिकीय उपापचय में व्यवधान के कारण जब कोशिका क्षतिग्रस्त हो जाती है तो लाइसोसोम फट जाता है इसमें मौजूद एन्जाइम अपनी ही कोशिका को पाचित कर देते है। इसके परिणाम स्वरूप कोशिका की मृत्यु हो जाती है। अत: इसे आत्महत्या की थैली भी कहा जाता है।
Concept note कोशिका में उपस्थित राइबोसोम के द्वारा प्रोटीन बनाया जाता है। किसी प्रोटीन के निर्माण के लिये आवश्यक अमीनो अम्ल को ये सही क्रम में लाने का कार्य करते है। राइबोसोम की खोज 1955 के दशक में रोमानिया के जीव वैज्ञानिक जार्ज पेलेड ने की थी, जिसके लिये इन्हे नोबल पुरस्कार मिला था।
Concept note यूकैरियोटिक कोशिकाएँ वे कोशिकाएँ कहलाती है, जिनमें केन्द्रक कला केन्द्रक तथा पूर्ण विकसित कोशिकांग पाये जाते हैं। इनके केन्द्रक (र्ल्म्तल्े) में प्रोटीन, DNA तथा RNA पाये जाते हैं अर्थात् RNA का संश्लेषण केन्द्रक (र्ल्म्तल्े) में होता है। जबकि RNA का मुख्य कार्य प्रोटीन संश्लेषण करना है। यूकैरियोटिक कोशिकाओं के उदाहरण हैं– शैवाल (हरे-नीले शैवाल के अतिरिक्त) तथा सभी विकसित जन्तु व वनस्पति कोशिकायें।
Concept note कोशिका सिद्धान्त का प्रतिपादन सर्वप्रथम श्लाइडेन एवं श्वान ने अपने कोशिका मत में प्रतिपादित किया था। कोशिका सभी जीवों की रचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई होती है। सबसे पहले कोशिका को राबर्ट हुक (1665) ने देखा था।
Concept note विषाणु अकोशकीय अति सूक्ष्म जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं, शरीर के बाहर तो ये मृत समान होते हैं परन्तु शरीर के अन्दर जीवित हो जाते हैं। कोशिका सिद्धान्त प्रतिपादन करने का श्रेय वनस्पतिशास्त्री श्लाइडेन तथा जन्तुशास्त्री श्वान को दिया जाता है।
Concept note कोशिका जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है। यह एक विशिष्ट पारगम्य कला से घिरी रहती है तथा इसमें प्राय: स्वजन की क्षमता होती है। प्रत्येक जीव का शरीर एक सूक्ष्ममत इकाई द्वारा निर्मित होता है, जिसे कोशिका कहते है। कोशिका की खोज 1665 ई. में ब्रिटिश वनस्पति शास्त्री राबर्ट हुक ने किया था। केन्द्रक (र्ल्म्तल्े) कोशिका का सबसे प्रमुख अंग है। यह कोशिका के प्रबंधक के समान कार्य करता है, जबकि माइटोकांड्रियाँ को कोशिका का शक्ति केन्द्र (झ्दैी प्दल्ो) कहते हैं।
Concept note माइटोकाण्ड्रिया की खोज अल्टमान नामक वैज्ञानिक ने 1890 ई. में की थी। यह कोशिका द्रव्य में पायी जाने वाली बहुत महत्चपूर्ण रचना है। जो कोशिका द्रव्य में बिखरी रहती है। अल्टमान ने इसे बायोप्लास्टर तथा बेण्डा ने माइटोकॉण्ड्रिया नाम दिया इसका आकार और आकृति परिवर्तनशील होता है। यह कोशिका द्रव्य में कणों, सूत्रों, छडों और गोलकों के रूप में बिखरा रहता है। प्रत्येक माइटोकॉण्ड्रिया एक बाहरी झिल्ली एवं एक अत: झिल्ली के चारो ओर घिरी रहती हैं तथा इसके बीच में एक तरल युक्त गुहा होती है। माइटोकॉण्ड्रिया को ऊर्जा उत्पन्न करने के कारण कोशिका का ऊर्जा गृह कहा जाता है। क्योकि 36 ATP अणु जो कि एक ग्लूकोज अणु के टूटने से बनते है। उनमें से 34 ATP (क्रेब्स चक्र के दौरान) माइटोकाण्ड्रिया में ही बनते है।
Concept note ‘केराटिन’ प्रोटीन उपकला (एपिथीलियम) कोशिकाआें को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है, मनुष्य के शरीर को 20 प्रकार के प्रोटीन की आवश्यकता होती है, जिनमें से 10 का संश्लेषण उसका शरीर स्वयं करता है, जबकि शेष 10 प्रोटीन भोजन के द्वारा प्राप्त होता है। •••• सबसे ज्यादा प्रोटीन सोयाबीन में पाया जाता है। •••• प्रोटीन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जे. बर्जेलियस ने किया था। यह एक जटिल कार्बनिक यौगिक है।
Concept note एक जीवित कोशिका के संपूर्ण अवयव को जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) कहते है। जिसमें साइटोप्लाज्म और नाभिक शामिल होता है। इसे जीवन का भौतिक आधार भी कहते हैं। यह एक तरल गाढ़ा, रंगहीन, लसलसा, वजनयुक्त पदार्थ है। जीवों की सभी जैविक क्रियाएँ इसी के द्वारा होती हैं। इसकी खोज डुजार्डिन ने की। इसका नामकरण जे. ई. पुरकिंजे द्वारा सन् 1839 में किया गया था।
Concept note पाइरूवेट साइटोप्लाज्म में ग्लाइकोलिसिस प्रक्रिया द्वारा निर्मित होता है, लेकिन पाइरूवेट का ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स (यूकेरियोट्स) में होता है। सभी जीवों में पोषण की प्रक्रिया में पहले चरण के दौरान ग्लूकोज के छह-कार्बन अणुओं में से विखंडित हुए तीन कार्बन अणुओं को पाइरूवेट कहा जाता है।
Correct answer: पादप कोशिकाओं मे क्लोरोप्लास्ट अनुपस्थित है।
Concept note यूकैरियोटिक कोशिकायें वे कोशिकायें कहलाती हैं जिनमें केन्द्रक कला, केन्द्रक तथा पूर्ण विकसित कोशिकांग पाये जाते हैं इनमें 80े प्रकार के राइबोसोम्स होते हैं। इनमें केन्द्रक पदार्थ (प्रोटीन DNA तथा RNA) कोशिकाद्रव्य के सीधे सम्पर्क में नहीं रहते बल्कि केन्द्रक द्रव्य के सम्पर्क में रहते हैं। इनके गुणसूत्रो में हिस्टोन प्रोटीन पाई जाती हैं। यूकैरियोटिक कोशिकाओं के उदाहरण हैं, शैवाल गलत है क्योंकि पादप कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट पाया जाता है।
Concept note लाइसोसोम जन्तु कोशिका के कोशिका द्रव में पाए जाने वाली अनियमित आकार की आवरणयुक्त गोल-गोल थैलीनुमा रचनाएँ है। यह अन्त: कोशिकीय पाचन में मदद करता है। इनका कार्य कोशिकाओं के अन्दर पहुँचे खाद्य पदार्थो तथा बाह्य पदार्थो का पाचन करना है। इनके फटने पर कोशिकांगों का स्वपाचन भी हो जाता है, इसलिए इन्हें ‘आत्महत्या की थैली’ कहते हैं।
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