Concept note संयोजी ऊतक मानव शरीर में एक अंग को दूसरे अंग से जोड़ने का कार्य करता है तथा यह प्रत्येक अंग में पाया जाता है, जो शरीर को एक ढांचा प्रदान करता है। दृढ़ संयोजी ऊतकों द्वारा कंकाल से जुड़ी रहने वाली कंकाल मांसपेशियाँ ‘नसें’ कहलाती है। नसें पतली दीवार वाली रक्त वाहिकाएं होती है, जो शरीर के सभी हिस्सोें से रक्त को लेकर वापस हृदय में पहुँचाती है। (ग्ग्) पादप ऊतक
Concept note कोलेनकाइमा कोशिकाएँ अंडाकार गोलाकार या बहुभुज आकार की होती है। सेल्युलोज के निक्षेपण के कारण उनके कोशिका के किनारे मोटे हो जाते हैं। यह तनों और पत्तियों को लचीलापन या यांत्रिक सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। • स्क्लेरेनकाइमा ऊतक पौधों को कठोर एवं सख्त बनता है। • पैरेन्काइमा ऊतक पौधों में प्राय: भोजन का भंडारण करती है।
Concept note विभाज्योतिकी ऊतक के अन्तर्गत कोशिकाओं के वे समूह आते हैं, जिनमें कोशिकाएँ या तो विभाजित होने वाली हों या विभाजित हो रही हो, या उनमें विभाजन की क्षमता है। ये ऊतक पौधों के वर्धी भागों में मिलते हैं। इस ऊतक के निरन्तर विभाजन से पौधे के सभी भाग बनते हैं तथा पौधे में वृद्धि होती है।
Concept note पौधों की वृद्धि केवल उनके कुछ निश्चित एवं विशेष भागों में ही होती है। ऐसा विभाजित होने वाले ऊतकों के कारण ही होता है। ऐसे विभाजित होने वाले ऊतक पौधों के वृद्धि वाले भागों में ही स्थित होते है, इस प्रकार के ऊतक को विभज्योतक ऊतक कहते हैं। इन कोशिकाओं में केन्द्रक बड़ा, जीवद्रव्य सघन तथा रिक्तिका विहिन होती है इन कोशिकाओं में माइट्रोकॉण्ड्रिया की संख्या अधिक होती है।
Concept note स्क्लेरेन्काइमा ऊतक में मजबूत तथा मोटी लिग्निफाइड सतहे होती है। यह ऊतक मृत कोशिकाओं से बना होता है। इसकी कोशिका भित्ति मोटी होती है तथा जिस पर लिग्निन का जमाव होता है।
Concept note वेलामेन (पादप ऊतक) का कार्य जल अवशोषण है। समान उत्पत्ति तथा समान कार्यों को सम्पादित करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते है। यह पौथों को यांत्रिक सहारा प्रदान करता है। इस शाखा की स्थापना इटली के वैज्ञानिक मारसैली मैल्पीधी ने की थी।
Concept note निम्न श्रेणी के पौधों में वृद्धि प्राय: उनके पूरे शरीर में होती है, किन्तु उच्च वर्ग के पौधों में यह वृद्धि कुछ विशेष भागों में सीमित रहती है। पौधे में ये विभाज्योतक कुछ विशेष स्थान पर पाये जाते हैं। शीर्षक विभाज्योतक - ये तने के शीर्ष तथा जड़ों के शीर्ष पर पाये जाते हैं जिससे पौधों की लम्बाई बढ़ती है। अंतर्विष्ट विभाज्योतक - ये पर्वसन्धि (र्द) के ऊपर पाये जाते हैं जिससे पौधों के तने के पर्व (घ्हूीहद) लम्बाई में वृद्धि करते हैं। पार्श्व विभाज्योतक - इससे जड़ों की मोटाई बढ़ती है।
Concept note दिये गये विकल्पों में से पेड़ की पोषवाह (झ्प्त्दास्) उतारने से वह सबसे आसानी से मृत हो जायेगा क्योंकि पौधों के अन्य भागों तक पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन नहीं पहुॅच पायेगा। दारू (जाइलम) जड़ों द्वारा अवशोषित जल तथा पोषक तत्वों को पत्तियों तक पहुॅचता है जबकि पोषवाह (झ्प्त्दास्) पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन को पौधों के अन्य भागों तक स्थानांतरित होता है। पोषवाह के सूखने पर छाल का निर्माण होता है जो पोषवाह की सबसे बाह्य तथा मृत परतें हैं। नोट- आयोग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया है।
Concept note पौधों में जल एवं खाद्य पदार्थो को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिये जाइलम एवं फ्लोएम मौजूद होता है। जिसमें से जाइलम मुख्य रूप से पौधों की जड़ो से जल को पत्तियों और शाखाओं तक पहुँचाने का कार्य करता है। जबकि खाद्य पदार्थों का संवहन फ्लोएम करता है।
Correct answer: फ्लोएम में अतनुकारी शर्करा के रूप में शर्करा का परिवहन होता है।
Concept note फ्लोएम पौधे के तने, जड़ एवं पत्तियों में पाए जाते हैं। फ्लोएम पत्तियों द्वारा तैयार अतनुकारी शर्करा के रूप में शर्करा को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाते हैं। सरल भाषा में कहा जाए तो फ्लोएम पत्तियों द्वारा तैयार भोज्य पदार्थों को और जाइलम पौधे की जड़ से जल को पौधे के विभिन्न भागों में परिवहन हेतु उत्तरदायी होते हैं।
Concept note समान उत्पत्ति, संरचना एवं कार्यों वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते है। पौधों में दो प्रकार के संवहन ऊतक जाइलम तथा फ्लोएम पाये जाते है। फ्लोएम पत्तियों द्वारा निर्मित भोज्य पदार्थों को पौधों के अन्य भागों तक पहुँचाता है जबकि जाइलम मृदा से जल तथा पोषक तत्वों को पौधों के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
Concept note ‘ओपेरॉन’ शब्द सर्वप्रथम 1960 में क्रेंच एकेडमी ऑफ साइंस द्वारा प्रवर्तित किया गया था। आनुवंशिकी में एकल प्रेरक के अंतर्गत ओपेरॉन जीनोमिक DNA कार्यात्मक इकाई होती है। स् - RNA में आनुवंशिक सूचना किस प्रकार से निहित होती है और इसका प्रोटीन में अनुवाद का ज्ञान विगत शताब्दी की विशेष उपलब्धि है। न्यूक्लिक अम्ल में केवल चार प्रकार के क्षारक होते हैं और प्रोटीनों में 20 विभिन्न प्रकार के अम्ल होते हैं। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि प्रोटीन भाषा की वर्णमाला में 20 शब्द होते हैं, जबकि न्यूक्लिक अम्लों की भाषा में चार क्षारक रूपी अक्षर होते है। ऐसा संभव नहीं है कि एक क्षार एक अमीनो अम्ल के समतुल्य हो सके। यदि ऐसा हो, तो चार क्षारक केवल चार ही अमीनो अम्ल का प्रतिनिधित्व कर पाएँगे। यदि दो क्षारकों का एक अनुक्रम एक अमीनो अम्ल के लिए प्रयुक्त होता हो, तो भी केवल 4² 4 · 16 विभिन्न अनुक्रम बन पाएँगे जो केवल 16 अमीनो अम्लों के लिए पर्याप्त होंगे। मार्शल नीरेनबर्ग, ओकोवा, हरगोबिन्द खुराना, फ्रांसिस क्रिक एवं अन्य अनेक वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों के फलस्वरूप स्पष्ट हो गया है कि प्रत्येक अमीनो अम्ल के लिए तीन क्षारकों का विशिष्ट अनुक्रम होता है, जिसे त्रिक कहते हैं या कोडोन (ण्द्दह) भी कहते हैं। अत: स्पष्ट है कि जीन के जिस समूह की क्रिया को DNA साइट से समन्वित किया जाता है उसे ओपेरॉन (दज्ीदह) कहते हैं।
Concept note DNA एक प्राकृतिक ज्वाला मंदक है। जेम्स वाट्सन तथा फ्रॉसिस क्रिक ने 1953 में DNA की द्विकुंडलित संरचना प्रस्तुत की थी, जिसके लिए उन्हें 1962 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। DNA मूल रूप से एक आनुवंशिक प्रदार्थ है जो लक्षणों या गुणों को माता-पिता से संतानों में पहुचाने का कार्य करता है।
Concept note आर. एन. ए. पूरा नाम ‘राइबोन्यूक्लिक एसिड’ होता है। इसकी रचना डी. एन. ए. जैसी होती है सिर्फ बेस में थायमिन की जगह पर यूरेसिल होता है। कोशिका के अन्दर केन्द्रक तथा साइटोप्लाज्म दोनों में पाया जाता है। सामान्यत: RNA एक सूत्रीय होता है। RNA का मुख्य कार्य प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करना तथा पादप वायरसों में आनुवांशिक पदार्थो को वहन करने का कार्य करता है।
Concept note जीवित कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाए जाने वाले तंतुनुमा अणु को डी–ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल या डी एन ए कहते हैं। इसमें अनुवांशिक कूट निबद्ध रहता है। डी एन ए अणु की संरचना घुमावदार सीढ़ी की तरह होती है। न्यूक्लीक अम्ल न्यूक्लीयोटाइड से मिलकर बने होते है। एक न्यूक्लीयोटाइड तीन भिन्न रासायनिक घटकों से मिलकर बना होता है। पहला विषम चक्रीय यौगिक नाइट्रोजिनस क्षार, दूसरा मोनोसेकेराइड शर्करा डीआक्सीराइबोज, तीसरा फास्फोरिक अम्ल अथवा फास्फेट होता है।
Concept note विषाणु अकोशिकीय अतिसूक्ष्म जीव है। जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं। सभी विषाणुओं की रासायनिक संरचना समान होती है। तथा विषाणुओं का केन्द्रीय कोर प्रोटीन आवरण से ढका होता है। जिसे कैप्सिड कहते है। अत: स्पष्ट है कि प्रोटीन सभी विषाणुओं में पाया जाता है।
Concept note DNA संकरीकरण नामक तत्व यह निर्धारित करता है कि समान वंश और प्रजाति के जीवों का समूह सामान्य स्रोत से उद्भूत होता है या भिन्न-भिन्न स्रोतों से।
Concept note जीन गुणसूत्रों पर स्थित डी.एन.ए (DNA) की बनी वो अति सूक्ष्म संरचनाएँ हैं, जो अनुवांशिक लक्षणों को धारण एवं उनका एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरण करती है। जीन वंशाणु या पैत्रिक कहलाती है, जीन डी एन ए के न्यूक्लियोटाइडो का ऐसा अनुक्रम है, जिसमें सन्निहित कूटबद्ध सूचनाओं से अंतत: प्रोटीन के सश्लेषण का कार्य सम्पन्न होता है। ये अनुवांशिकता के बुनियादी और कार्यक्षम घटक होते हैं। यह यूनानी भाषा के जीनस से बना है। जीन शब्द जोहान्सन ने दिया था।
Concept note जनकों से संतति में संचरित होने वाली आनुवशिंक इकाईयां जीन कहलाती है। या ‘‘गुणसूत्र के किसी निश्चित स्थान पर स्थित ईकाई जो किसी विशिष्ट लक्षण के लिए उत्तरदायी होती है, जीन कहलाती है।’’ जीन DNA के न्यूक्लियोटाइडों का ऐसा अनुक्रम है, जिसमें सन्निहित कूटबद्ध सूचनाओ में अतंत: प्रोटीन संश्लेषण का कार्य संपन्न होता है। अर्थात न्यूक्लियोटाइडों का अनुक्रम (पॉलिन्यूक्लियोटाइड्स) जीन के गठन का कार्य करती हैं।
Concept note डी.एन.ए. या डीऑक्सी राइबोन्यूक्लिक एसिड अणुओं का एक समूह है, जो वंशानुगत जानकारियों को एक से दूसरे में पहुँचाने के लिये जिम्मेदार होते हैं। डी.एन.ए. में उपस्थित क्षार चार प्रकार के होते हैं एडीनीन, गुआनीन, थायमीन तथा साइटोसीन। जबकि यूरोसिल आर.एन.ए. में उपस्थित होता है।
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