Concept note कार्बोहाइड्रेड का शरीर में भंडारण के दो रूप है। कार्बोहाइड्रेड का अल्पावधि संग्रहण मांशपेशियों में ग्लाइकोजन के रूप में होता है। ग्लाइकोजन के अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेड का दीर्घकालिक भंडारण शरीर में वसा के रूप में है। जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर कम हो जाता है तो ग्लाइकोजन यकृत से मुक्त होकर ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है।
Concept note ग्लाइकोजन ग्लूकोस का एक बहुशाखायुक्त पॉलीसेकेराइड है जो मानव, जानवरों और कवक में ऊर्जा भंडारण के रूप में कार्य करता है। मनुष्यों में ग्लाइकोजन मुख्य रूप से लीवर और मांसपेशियों में हाइड्रेटेड रूप में संग्रहित होता है, जबकि पौधों में ग्लाइकोजन स्टार्च के रूप में ऊर्जा भंडार के रूप में कार्य करता है।
Concept note भोजन का पाचन मानव मुख से शुरू हो जाता है और यह छोटी आंत तक जारी रहता है। मनुष्य की लार में टायलिन एन्जाइम पाया जाता है। टायलिन स्टार्च (मंड) को माल्टोज में तथा माल्टेज, माल्टोज को ग्लूकोज में परिवर्तित कर देता है। अग्नाशयी रस एमाइलेज कार्बोहाइड्रेट को शर्करा में परिवर्तित कर देता है। 5. गुणसूत्र
Concept note गुणसूत्र या क्रोमोसोम सभी वनस्पतियों व प्राणियोें की कोशिकाओं में पाई जाने वाले तंतु रूपी पिंड होते है तथा प्रत्येक प्रजाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित रहती है। मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या 23 जोड़ी अथवा 46 होती है। इसमें 22 गुणसूत्र नर और मादा में समान होते है जिन्हे समजात गुणसूत्र कहते हैं तथा 23वें जोड़े के गुणसूत्र स्त्री और पुरूष में समान नहीं होते हैं, जिन्हे विषमजात गुणसूत्र कहते हैं।
Correct answer: DNA प्रतिकृति, स्-RNA प्रतिलेखन, प्रोटीन स्थानांतरण
Concept note आणविक जीव विज्ञान में फ्रांसिस क्रिक ने मूल सिद्धांत (सेन्ट्रल डोग्मा) का विचार प्रस्तुत किया जिससे स्पष्ट है कि आनुवांशिक सूचनाओं का डीएनए से आरएनए व इससे प्रोटीन की तरह रहता है। DNA प्रतिकृति, स्-RNA प्रतिलेखन, प्रोटीन स्थानांतरण
Concept note मानव जाति में 23 जोड़े अर्थात 46 गुणसूत्र होते है। इनमें से 22 जोड़ीयों के गुणसूत्र स्त्रियों और पुरूषों में समान अपने- अपने जोड़ीदार के समजात होते है। इसे आटोसोम्स कहते है। पुरूषों में 23वीं जोड़ी समजात नहीं होते है। माता पिता से जिस सन्तान को XX गुणसूत्र मिलते है पुत्री और जिसे XY गुणसूत्र मिलते है वह पुत्र बनता है।
Concept note प्रत्येक जीवों की कोशिकाओं के केन्द्रक में पाये जाने वाले गुणसूत्रों की संख्या निश्चित होती है। मानव कोशिका में 46 गुणसूत्र पाए जाते हैं। ये गुणसूत्र सदैव जोड़े में रहते हैं। जिसमें 22 जोड़ी गुणसूत्र नर और मादा में समान होते हैं और अपने-अपने जोड़े के समजात होते हैं एवं तेइसवें जोड़े के गुणसूत्र स्त्री और पुरुष में समान नहीं होते जिन्हें विषमजात गुणसूत्र कहते हैं।
Concept note समजात क्रोमोसोम के समान लोकस पर उपस्थित ऐसे जीव जो एकान्तर रूप में समान लक्षण को प्रदर्शित करते है, एलील कहलाते है। विरोधी गुणो का युग्म जो समान विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, युग्माविकल्पी (एलील) कहते है। उदाहदण– TT या समजात प्रभावी क्रोमोसोम (एलील) ऊू– समाज अप्रभावी क्रोमोसोम (एलील)
Concept note गुणसूत्र मैट्रिक्स तथा डी.एन.ए. का बना होता है। मैट्रिक्स एक तरल पदार्थ है जिसमें धागे के समान एक क्रोमैटिन होता है जो DNA तथा हिस्टोन प्रोटीन का बना होता है। ध्यातव्य है कि इण्टरफेज केन्द्रक का क्रोमेटिन जालक कोशिका विभाजन के समय संघनित होकर धागों या छड़ों के समान रचनाएँ बनाती है। इन रचनाओं को गुणसूत्र कहते हैं। इन्हे आनुवंशिक लक्षणों का वाहक भी कहते हैं।
Concept note ग्रेगर जॉन मेण्डल ने 1856 से 1863 तक मटर के पौधों पर संकरण के बहुत से प्रयोग किये तथा वंशानुक्रम के मौलिक नियम की खोज की। मेण्डल ने निष्कर्ष निकाला कि वंशागति की इकाई तरल द्रव न होकर ठोस द्रव है। इस इकाई को मेण्डल ने कारक कहा किन्तु अब इसे जीन कहते हैं। मेण्डल ने आनुवशिंकी के तीन नियम दिये– 1. विसंयोजन नियम– लक्षण विशेष प्रथम पीढ़ी में छिप जाने पर भी बाद की पीढि़यों में प्रकट हो जाते है। 2. स्वतंत्र अपव्यूहन नियम– दो या अधिक लक्षणों के जोड़ों के संकरण में प्रत्येक जोड़ा कारक स्वतंत्र रूप से स्थानातंरित होता है। 3. प्रभाविकता का नियम– यदि कोई दो कारक हो और वह दोनों समान न हो तो उनमें से एक कारक दूसरे पर आसानी से प्रभावी हो जायेगा।
Concept note ग्रेगर जॉन मेंडल एक जर्मन भाषी ऑस्ट्रियाई पादरी एवं वैज्ञानिक थे। उन्हें आनुवांशिकी का जनक कहा जाता है। उन्होंने मटर के दानो पर प्रयोग कर आनुवांशिकी के नियम निर्धारित किए थे। उनके कार्यों की महत्ता बीसवीं शताब्दी तक नहीं पहचानी गई बाद में उन नियमों की पुनर्खोज ने उनका महत्व बताया। डब्लू वाटसन ने 1905 में सर्वप्रथम जेनेटिक्स नाम का उपयोग किया था। मेण्डल ने आनुवंशिकता से संबंधित तीन नियम प्रस्तुत किए थे (1) प्रभाविता का नियम (2) पृथक्करण का नियम (3) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम।
Concept note ‘हीमोफीलिया’ या ‘पैत्रिक रक्तस्राव’, वह रोग है जिसमें रोगी के शरीर से बहने वाले रक्त में रक्त का थक्का नहीं जम पाता है। ऐसा थ्राम्बोप्लास्टिन नामक प्रोटीन की कमी के कारण होता है। यह एक अनुवांशिक रोग है जो स्त्रियों द्वारा फैलता है और प्राय: पुरुषों को होता है।
Concept note अधिरक्तस्त्राव मानव में होने वाला एक लिंग सहलग्न रोग है। इस रोग से पीड़ीत व्यक्ति में चोट लगने से होने वाला रक्तस्राव जल्दी बन्द नहीं होता। यह रोग वंशानुगति द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाता है।
Concept note वर्णान्धता मुख्यत: शंकुकोशिका (ण्दहा णत्त्) में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होता है। यह एक प्रकार का आनुवांशिक रोग है। इसको डाल्टॉनिज्म नाम से भी जाना जाता है। इस रोग से ग्रसित व्यक्तियों में लाल एवं हरे रंग को पहचानने की क्षमता नहीं होती है। यह लिंग सम्बंधी रोग है जिसकी वाहक स्त्रियाँ होती हैं तथा पुरुष मुख्यत: प्रभावित होते हैं। स्त्रियों में यह रोग तभी होता है जब इसके दोनों XX गुणसूत्र प्रभावित हों। 7. जैव विकास
Concept note CCMB (सेन्टर फॉर सेल्युलर SCड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी) ने एक अध्ययन में इस बात की पुष्टि किया है कि शुतुरमुर्ग भारत में 25000 वर्ष पहले पुरापाषाण काल में महाराष्ट्र में पाये जाते थे।
Concept note जब गुणसूत्र की जीन अवस्था में कोई अन्तर आ जाये या उनमें कोई अतिरिक्त जीन जुड़ जाये तब उसे गुणूसत्र उत्परिवर्तन कहते हैं। यह उत्परिवर्तन आनुवंशिक गलती मानी जाती है। उत्परिवर्तन का सिद्धांत ह्यूगो डी ब्रीज ने दिया था।
Concept note व्यक्तियों के एक स्थान से दूसरे स्थान में जाकर बसने की क्रिया को ‘प्रवास’ कहते हैं। प्रवास के अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं। प्रवास का सबसे बड़ा प्रभाव जनसंख्या के आकार और जीवन के तरीकों पर पड़ता है। जहाँ से व्यक्ति प्रवासित हुए हैं, वहाँ जनसंख्या के दबाव में कमी तथा आर्थिक अवसरों में वृद्धि होती है लेकिन जहाँ व्यक्ति प्रवासित होकर बसे हैं, वहाँ अनेक सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन होते है। जैसे- सांस्कृतिक संघर्ष, सामाजिक विघटन, निम्न स्वास्थ्य सेवाएँ आवास समस्या आदि अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
Concept note जो रोग एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होते है, उन्हें आनुवंशिक रोग कहते हैं। यह रोग डीएनए में गड़बड़ी के कारण होते हैं। आनुवंशिक रोग विषाणु द्वारा होने वाली बीमारी डाउन्स सिंड्रोम एड्स वर्णान्धता खसरा थैलेसीमिया हर्पीज हीमोफीलिया रेबीज पटाऊ सिन्ड्रोम पोलियो इंफ्लूएंजा
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