Correct answer: यूरेशियाई प्लेट काफी हद तक महासागरीय प्लेट है।
Concept note यूरेशियाई प्लेट एक महाद्वीपीय टेक्टॉनिक प्लेट है; जिसमें यूरेशिया महाद्वीप (यूरोप व एशिया महाद्वीपों का एक भूभाग) शामिल है। अत: प्लेट विवर्तनिकी के संदर्भ में यह कथन गलत है कि यूरेशियाई प्लेट काफी हद तक एक महासागरीय प्लेट है। जबकि अन्य सभी कथन सही है।
Concept note वर्ष 1967 में मैकेंजी, पारकर और मार्गन ने स्वतंत्र रूप से उपलब्ध विचारों को समन्वित कर अवधारणा प्रस्तुत की जिसे प्लेट विवर्तनिकी (प्लेट टेक्टोनिक्स) कहा गया। एक विवर्तनिकी प्लेट (जिसे लिथोस्कीयर प्लेट भी कहा जाता है), ठोस चट्टान का विशाल व अनियमित आकार का हिस्सा है, जो महाद्वीपीय व महासागरीय स्थलमंडलों से मिलकर बना है। प्लेट विवर्तनिकी के सिद्धान्त के आधार पर पृथ्वी का स्थलमंडल सात मुख्य प्लेटों व कुछ छोटी प्लेटों में विभाजित है। 1. अंटार्कटिक प्लेट 2. उत्तरी अमेरिकी प्लेट 3. दक्षिण अमेरिकी प्लेट 4. प्रशांत महासागरीय प्लेट 5. इंडो आस्ट्रेलियन प्लेट 6. अफ्रीकी प्लेट 7. यूरेशियाई प्लेट
Concept note मृदा के संस्तर (होरिजन) A में खनिज पदार्थ, पोषक तत्वों और जल के साथ कार्बनिक पदार्थ समाविष्ट होते है। इसे टॉपसॉयल भी कहा जाता है। इस परत में गहरे रंग के विघटित कार्बनिक पदार्थ को ह्यूमस कहा जाता है।
Concept note सिलिका, पृथ्वी के महाद्वीपीय द्रव्यमान में मुख्य खनिज घटकों में से एक है। सम्पूर्ण पृथ्वी के निर्माण में निम्नलिखित तत्वों की प्रधानता होती है- लोहा (इा) – 35% ऑक्सीजन (O) – 30% सिलिका (एग्) – 15% मैग्नीशियम (श्ु) – 13% एल्युमीनियम (Aत्) – 1.4% कैल्शियम (ण्a) – 1.5%
Concept note ज्वालामुखी भूपटल पर वह प्राकृतिक छेद या दरार है, जिससे होकर पृथ्वी का पिघला लावा, राख, वाष्प तथा गैस सतह पर आता है। इस क्रिया के परिणामस्वरूप पृथ्वी के आंतरिक तथा बाह्य भागों में अनेक स्थलाकृतियों का निर्माण होता है तथा जिस छिद्र या दरार से होकर गर्म लावा गैस चट्टानों के टुकड़े धूल कण इत्यादि बाहर प्रकट होते हैं, उसे ज्वालामुखी कहा जाता है।
Concept note पृथ्वी की संरचना तीन परतों द्वारा होती है, पर्पटी या भूपर्पटी (पृथ्वी के आयतन का 0.5 प्रतिशत भाग), क्रोड (पृथ्वी के आयतन का 16 प्रतिशत भाग), मैंटल (पृथ्वी के आयतन का 83% भाग। भूपर्पटी और मैंटल के बीच की सीमा ‘मोहोरोविकिक असातत्य’ द्वारा बनती है जिसे ‘मोहो असम्बद्धता’ भी कहा जाता है। मैंटल का विस्तार मोहो से लेकर 2900 किमी. की गहराई पर स्थित ‘गुट्टेन्बर्ग असातत्य’ तक है।
Concept note पृथ्वी सतह की सबसे ऊपरी परत को क्रस्ट या भूपर्पटी कहते है। इसकी मोटाई महाद्वीपों व महासागरों के नीचे अलग-अलग है। महासागरों में इसकी मोटाई महाद्वीपों की तुलना में कम है। महासागरों के नीचे इसकी औसत मोटाई 5 किमी. है; जबकि महाद्वीपों के नीचे इसकी औसत मोटाई 35 किमी. तक है। हिमालय पर्वत श्रेणियों के नीचे इसकी मोटाई लगभग 70 किमी. तक है। क्रस्ट भारी चट्टानों से बना है और यह बहुत भंगुर भाग है।
Concept note पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (क्रस्ट) में उपलब्ध तत्व क्रमश: है- ऑक्सीजन (46.6%), सिलिकॉन (27.72%), एल्युमिनियम (8.13%), लोहा (5%), कैल्शियम (3.63%), सोडियम (2.83%), पौटेशियम (2.59%), मैग्नेशियम (2.09%) अत: विकल्प (b) सही है।
Concept note सिलिकॉन तथा ऑक्सीजन सभी फेल्सपारों में उपस्थित होते हैं। पृथ्वी की भू-सतह (क्रस्ट) का आधा भाग फेल्सपार से बना है। इसका रंग हल्का क्रीम से हल्का गुलाबी तक होता है। चीनी मिट्टी के बर्तन तथा काँच बनाने में इसका उपयोग होता है।
Concept note पृथ्वी के धरातल से केन्द्र की ओर (भूगर्भ की ओर) जाने पर गहराई के साथ-साथ तापमान में वृद्धि होती है। साधारणत: प्रत्येक 32 मी. की गहराई पर 10ण् का तापमान बढ़ जाता है। ध्यातव्य है कि यह प्रक्रिया सामान्य रूप से 8 किमी. की गहराई तक होती है। परन्तु इसके बाद तापमान में गहराई के साथ वृद्धि दर एक समान नहीं रह जाती है।
Concept note भूकम्पीय तरंगों के आधार पर पृथ्वी को तीन परतों में विभाजित किया गया है- (1) स्थलमण्डल (लिथोस्फीयर)- यह पृथ्वी का सबसे ऊपरी भाग है जिसे सियाल भी कहा जाता है। इसकी गहराई 10 से 200 किमी. मानी गई है। यह भूपर्पटी और मैंटल के ऊपरी- भाग से मिलकर बना होता है। (2) पाइरोस्फीयर – इस आवरण को मिश्रित मण्डल भी कहते हैं। इस परत में बेसाल्ट की अधिकता पायी जाती है। इसकी मोटाई 100 से 2880 किमी. तक है। (3) बैरीस्फीयर – यह पृथ्वी का सबसे आन्तरिक भाग है। इसमें लोहा एवं निकेल की अधिकता पायी जाती है। यह 2880 किमी. से आगे स्थित है।
Concept note पृथ्वी की पर्पटी के द्रव्यमान में प्रमुख तत्वों का लगभग प्रतिशत अनुपात इस प्रकार है: ऑक्सीजन (O) 46.6%, सिलिकन (Si) 27.7%, एल्युमिनियम (Al) 8.13%, लोहा (Fe) 5.0%, मैग्नीशियम (Mg) 2.1%, कैल्शियम (Ca) 3.6%, पोटैशियम (K) 2.4% और सोडियम (Na) 2.8%। इन आठ प्रमुख तत्वों में ऑक्सीजन का अनुपात सर्वाधिक है।
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