Concept note सूर्य के द्वारा उत्सर्जित प्रकाश का रंग श्वेत (सफेद) होता है। सफेद प्रकाश मुख्यत: परस्पर मिश्रित सात रंगीन प्रकाशों का मिश्रण होता है। जब श्वेत सौर प्रकाश प्रिज्म से होकर गुजरता है तो वह अपवर्तन के पश्चात प्रिज्म के आधार की ओर झुकने के साथ- साथ सात रंग के प्रकाशों बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल में बंट जाता है। इस प्रकार प्राप्त प्रकाश रंग समूह के क्रम को प्रकाश का वर्णक्रम कहते हैं। बैंगनी रंग के प्रकाश का अपवर्तन (झुकाव) सर्वाधिक एवं लाल रंग का सबसे कम होता है। (ग्ग्) प्रकाश का प्रकीर्णन
Concept note जब प्रकाश किसी सूक्ष्म निलंबित कणों वाले माध्यम अर्थात् कोलाइडी विलयन से होकर गुजरता है, तो प्रकाश का प्रकीर्णन होता है तथा इसे प्रकाश की दिशा के लम्बवत् देखने पर, कोलाइडी विलयन में प्रकाश पुंज का मार्ग चमकता हुआ दिखाई देता है, इसी परिघटना को टिंडल प्रभाव कहते हैं।
Concept note उस परिघटना (प्रकाश के प्रकीर्णन द्वारा संचालित) का नाम एल्पेंग्लो है। जिसमें सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पहाड़ों की चोटियाँ गुलाबी या नारंगी रंग (वर्ण) की हो जाती हैं। (ग्ग्ग्) प्रकाश का परावर्तन
Concept note अवतल दर्पण एक प्रकार का गोलीय दर्पण है, जिसमें की परावर्तन करने वाली चिकनी व चमकीली सतह अंदर की तरफ धंसी होती है। अवतल दर्पण के उपयोग:- 1. वाहनों में हेडलाइट के रूप में उपयोग किया जाता है। 2. आँख, कान तथा नाक के डॉक्टर के द्वारा उपयोग किया जाता है। 3. सर्चलाइट में उपयोग किया जाता है। 4. सोलर कूकर में उपयोग किया जाता है।
Concept note समतल दर्पण – समतल दर्पण में किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है। यह प्रतिबिम्ब काल्पनिक वस्तु के बराबर तथा पार्श्व उल्टा होता है। समतल दर्पण में प्रकाश का पार्श्व व्युत्कमण प्रदर्शित होता है।
Concept note अवतल दर्पण वह दर्पण है जिसका उपयोग सर्च लाइटों में परावर्तक के रूप में किया जाता है। अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण के रूप में भी जाना जाता है। अवतल दर्पण से बनने वाला प्रतिबिम्ब निम्न प्रकार का होता है। (I) यदि वस्तु दर्पण के ध्रुव व फोकस बिन्दु के बीच में हो तो प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा वस्तु से बड़ा बनता है। (ग्ग्) यदि वस्तु वक्रता केन्द्र पर हो तो प्रतिबिम्ब वास्तविक उल्टा तथा वस्तु के आकार के बराबर बनता है।
Concept note समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब का आकार सदैव वस्तु या प्राबिम्ब के बराबर, काल्पनिक सीधा एवं पार्श्व परिवर्तित होता है। समतल दर्पण में वस्तु का पूर्ण प्रतिबिम्ब देखने के लिए दर्पण की लम्बाई वस्तु की लम्बाई की कम से कम आधी होनी चाहिए।
Concept note समतल दर्पण, काँच की समान मोटाई की चिकनी पट्टी के एक तरफ किसी चमकीली धातु जैसे- पारा या चाँदी का लेप करके तथा उसके ऊपर सिल्वर नाइट्रेट का लेप करके बनाया जाता है। समतल दर्पण की विशेषताएं है- (1) समतल दर्पण की स्थिति में आपतन कोण व परावर्तन कोण आपस में बराबर होते हैं। (2) समतल दर्पण पर किसी व्यक्ति द्वारा अपना पूरा प्रतिबिम्ब देखने के लिए दर्पण की लंबाई कम से कम उसकी आधी होनी चाहिए। (3) समतल दर्पण पर प्रतिबिम्ब काल्पनिक उर्ध्वाधर सीधा तथा वस्तु के बराबर एवं पार्श्व उल्टा बनता है।
Concept note जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह उभरी रहती है, उसे उत्तल दर्पण कहा जाता है। इसे अपसारी दर्पण भी कहा जाता है क्योंकि यह अनंत से आने वाली किरणों को फैलाता है। उत्तल दर्पण में किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब सदैव दर्पण के पीछे उसके ध्रुव व फोकस के मध्य, वस्तु से छोटा, सीधा एवं आभासी बनता है। ध्यातव्य है कि इसका उपयोग ट्रक-चालकों या मोटरकारों में चालक के बगल पश्चदर्शी दर्पण के रूप में किया जाता है।
Correct answer: प्रकाश के सम्पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण
Concept note पानी में से पैदा होने वाले बुलबुले में जो चमक होती है वह मुख्यत: प्रकाश के सम्पूर्ण आन्तरिक परार्वतन के कारण होती है। जब सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से अधिक हो जाता है तो आपतित प्रकाश किरण परावर्तित होकर पुन: उसी माध्यम में वापस चली जाती है। यह घटना प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहलाता है।
Concept note जो लेंस बीच में पतला तथा किनारों पर मोटा होता है, उसे अवतल लेंस कहते है। यह आपतित समांतर किरणों को अपसारित कर देता है अर्थात् फैलाने की प्रवृत्ति रखता है इसीलिए इसे अपसारी लेंस भी कहते हैं। अवतल लेंस द्वारा वस्तु की प्रत्येक स्थिति के लिए प्रतिबिंब, लेंस व फोकस के बीच, आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा बनता है। ध्यातव्य है कि निकट दृष्टि दोष के निवारण के लिए अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है।
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