जड़ त्व किसी वस्तु का वह गुण है, जिसके कारण वह किसी निकाय द्वारा लगाये गये बल के कारण अपनी वर्तमान स्थिति में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तुओं की इस प्रवृत्ति का नाम ‘जड़त्व/जड़ ता’ गैलीलियो द्वारा दिया गया है। वस्तु का जड़ त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। द्रव्यमान जितना अधिक होगा वस्तु में जड़ त्व अर्थात् वर्तमान स्थिति में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति या क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
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जड़ त्व किसी वस्तु का वह गुण है, जिसके कारण वह किसी निकाय द्वारा लगाये गये बल के कारण अपनी वर्तमान स्थिति में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तुओं की इस प्रवृत्ति का नाम ‘जड़त्व/जड़ ता’ गैलीलियो द्वारा दिया गया है। वस्तु का जड़ त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। द्रव्यमान जितना अधिक होगा वस्तु में जड़ त्व अर्थात् वर्तमान स्थिति में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति या क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
Q102.आइजेक न्यूटन ने गति के कितने नियमों का सूत्रीकरण किया था?
गति विषयक तीन मूल नियम सर्वप्रथम सर आइजेक न्यूटन ने सन् 1687 में अपनी पुस्तक ‘प्रिंसिपिया’ में प्रतिपादित किया—इन्होंने ही गुरूत्वाकर्षण के बारे में दुनिया को बताया था।
Q103.एक तोप फाइरिंग के बाद पीछे क्यों हटती है?
तोप का फाइरिंग के बाद इसका पीछे हटना न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया प्रतिक्रिया का नियम) का एक उदाहरण है।
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q105.रॉकेट प्रणोदन प्रौद्योगिकी निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक सिद्धांत पर काम करती है?
रॉकेट प्रणोदन प्रौद्योगिकी न्यूटन के गति के तृतीय नियम पर काम करती है। रॉकेट में किसी ज्वलनशील पदार्थ को जलाकर गैसें उत्पन्न की जाती है जो नीचे की ओर अत्यंत तीव्र वेग से एक जेट के रूप में निकलती है। ये गैसें रॉकेट पर ऊपर की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती है जिससे रॉकेट ऊपर उठ जाता है। गैस के जेट का वेग जितना अधिक होता है रॉकेट भी ऊपर की ओर उतने ही अधिक वेग से उठता है। न्यूटन के गति का तृतीय नियम– प्रत्येक क्रिया बल के बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल कार्य करता है। इसे क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम भी कहते हैं। अर्थात् जब कोई पिण्ड किसी वस्तु पर बल लगाता है तो वस्तु भी उस पिण्ड पर उतना ही बल परन्तु विपरीत दिशा में लगाती है। (न्ग्) बल
Q106.बल आघूर्ण की दिशा क्या होती है?
बल लगाकर किसी पिण्ड को किसी अक्ष के परित: घुमाने की क्रिया को बल आघूर्ण कहा जाता है। किसी अक्ष के परित: किसी बल का बल आघूर्ण उस बल के परिमाण तथा उस अक्ष से बल की क्रिया रेखा के बीच की लम्बवत् दूरी के गुणनफल के बराबर होता है तथा बल आघूर्ण की दिशा प्रयुक्त बल के लम्बवत् होती है। बल आपूर्ण एक सदिश राशि है एवं इसका SI मात्रक न्यूटन मीटर होता है।
Q107.बल आघूर्ण की एस. आई. इकाई क्या है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q108.आवेग किसके तुल्य होता है?
यांत्रिकी में बल का आवेग, संवेग में परिवर्तन के समतुल्य होता है आवेग एक अदिश राशि है। किसी वस्तु पर लगा आवेग उसके रैखिक गति में एक समान सदिश परिवर्तन पैदा करता है आवेग का एसआई मात्रक न्यूटन.सेकंड होता है।
एक वस्तु को असमान गति में कहा जायेगा, जब किसी सरल रेखा में चलते हुए उसकी चाल परिवर्तित होती रहती है अर्थात् जब कोई वस्तु समान समय के अन्तर में असमान दूरियां तय करती है तो उसे असमान गति कहते है। (x) प्रक्षेप्य गति
Q110.यदि कोई वस्तु ऊपर की तरफ फेंकी जाये तो अधिकतम ऊँचाई पर पहुँचने पर उसका वेग क्या होगा?
किसी पिण्ड को प्रक्षेप्यपथ के अधिकतम ऊँचाई पर पहँुचने पर उसका वेग शून्य हो जाता है।
Q111.त्वरण के SI मात्रक में ‘सेकंड’ का घातांक क्या होता है?
त्वरण का SI मात्रक मी./से.2 या मी.-से.–2 होता है अत: त्वरण के SI मात्रक मे सेकंड का घातांक -2 होता है।
Q112.हम बिना फिसले पृथ्वी पर चलने में क्यों सक्षम है?
सम्पर्क में रखी दो वस्तुओं के बीच एक प्रकार का बल कार्य करता है। जो आपेक्षिक गति करने में वस्तु की गति का विरोध करता है, यह बल घर्षण बल कहलाता है इसके कुछ दैनिक उदाहरण निम्न है- (1) इस बल के कारण ही मनुष्य सीधा खड़ा रहता है और चल पाता है। (2) यदि सड़को पर घर्षण बल न हो तो पहिए फिसलने लगते है। (3) यदि पट्टा एवं पुल्ली के बीच घर्षण बल न हो तो मोटर पुल्ली को नहीं घुमा सकेगा। (4) घर्षण बल के कम होने के कारण केले के छिलके पर तथा बरसात के दिनों में चिकनी सड़क पर फिसलन होती है।
Q113.ब्रेक लगाने पर वाहन को रोकने वाले बल को क्या कहते हैं?
चलती हुई वाहन पर ब्रेक लगने पर, उसका रूकना घर्षण बल के कारण ही होता है। इस बल के कारण पहियों में फिसलन नहीं होता है।
Q114.यदि गति में रहते हुए घूर्णन की धुरी किसी वस्तु में से होकर गुजरती है, जो उस गति को कहा जाता है। –––
यदि गति में रहते हुए घूर्णन की धुरी किसी वस्तु में से होकर गुजरती है, तो उस गति को घुमाव गति कहते हैं।
Q115.घूर्णन गति के दो प्रकार कौन है?
किसी पिण्ड का उसके अक्ष के चारो ओर घूमना या गति करना ‘घूर्णन गति’ कहा जाता है। घूर्णन गति दो प्रकार की होती है कक्षीय तथा स्पिन। इनमें विशेष अन्तर नहीं होता है। यदि घूर्णन अक्ष पिण्ड के तल के लंबवत होता है तो इसे स्पिन गति कहते हैं तथा नाभिक के चारों ओर किसी इलेक्ट्रॉन की गति कक्षीय गति कहलाती है।
Q116.अभिकेन्द्रीय त्वरण और स्पर्शरेखा त्वरण के बीच कौन- सा कोण होता है?
जब कोई पिण्ड वृत्तीय पथ पर गति करता है तो वृत्ताकार पथ के प्रत्येक बिन्दु पर अभिकेन्द्रीय त्वरण और स्पर्श रेखीय त्वरण की दिशा एक-दूसरे के लम्बवत् अर्थात् 900 होती है।
Q117.निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता समान वृत्तीय गति के लिए सही नहीं है?
जब कोई पिण्ड ऐसी गति करता है कि उसकी गति का पथ एक वृत्त हो तो ऐसी गति को वृत्तीय गति कहते है। एकसमान वृत्तीयगति में पिण्ड का वेग सदैव वृत्त की त्रिज्या के लंबवत होता है। जबकि वृत्तीय गति में पिण्ड द्वारा तय की गई दूरी पिण्ड के विस्थापन के बराबर नहीं होती है।
Q118.किसी सरल लोलक की गति एक ––––– का उदाहरण है।
एक निश्चित पथ पर गति करती वस्तु जब किसी निश्चित समय-अंतराल के पश्चात बार-बार अपनी पूर्व गति दोहराती है, तो इस प्रकार की गति को आवर्त गति कहते हैं। जैसे-सरल लोलक की गति, झूला झलते बालक की गति, स्प्रिंग को खींचने पर होने वाली गति।
Q119.निम्न में से कौन-सा ‘ऐक्शन-एट-S-डिस्टेंस’ बल है?
गुरूत्वाकर्षण को ‘ऐक्शन-एट-S-डिस्टेंस’ बल भी कहते है। गुरूत्वाकर्षण पदार्थों द्वारा एक दूसरे की ओर आकर्षित होने की प्रवृत्ति है। इसके बारे में पहली बार कोई गणितीय सूत्र आइजैक न्यूटन द्वारा दिया गया था।
Q120.उस बल का नाम क्या है, जिससे पृथ्वी सब वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है?
ब्रम्हाण्ड में उपस्थित प्रत्येक दो बिन्दु द्रव्यमान या पिण्ड एक दूसरे को आकर्षित करते हैं, पिण्डों के मध्य लगने वाले इस आकर्षण बल को गुरूत्वाकर्षण बल कहा जाता है। इसका मान दोनों पिण्डों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती व उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। गुरूत्वाकर्षण बल के कारण ही पृथ्वी सब वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है।