Concept note समुद्र स्तर पर पानी का क्वथनांक 212ष्टइ (100ष्टण्) होता है। स्वच्छ जल का क्वथनांक 100ष्टण् ही होता है। जब किसी तरल को गर्म किया जाता है तो यह एक तापमान पर पहुँच जाता है जिस पर तरल की वाष्प का दबाव वायुमण्डलीय दबाव से अधिक हो जाता है जिससे तरल उबलने लगता है। इस तापमान को क्वथनांक कहते हैं। यह वायुमण्डलीय दाब पर निर्भर करता है जो ऊँचाई के अनुसार बदलता रहता है।
Concept note ऊष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है। जिसमें विभिन्न कार्य संपादित करने की क्षमता होती है। दो निकायों के मध्य ऊष्मा के प्रवाह की दिशा उनके ताप पर निर्भर करती है। ऊष्मा का प्रवाह उच्च ताप वाली वस्तु से निम्न ताप वाली वस्तु की ओर होता है। ध्यातव्य है कि उच्च ताप से निम्न ताप की ओर ऊष्मा के प्रवाह से दोनों वस्तुओं का ताप कुछ समय बाद बराबर हो जाता है। इसी अवस्था को ऊष्मीय संतुलन कहा जाता है।
Concept note 0 ख् को ‘परम शून्य ताप’ भी कहते है, ‘परम शून्य ताप’ वह ताप होता है, जिस पर पदार्थ के अणुओं की आण्विक गति बन्द हो जाती है, और इस ताप तक अणुओं में कुछ भी ऊर्जा शेष नहीं रहती है। 0 ख्, -273दण् (-273.150ण्) के बराबर होता है। केल्विन पैमाना ब्रिटिश भौतिक शास्त्री विलियम थामसन, प्रथम बैरन केल्विन के नाम पर रखा गया है।
Concept note ऊष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है, जो दो वस्तुओं के बीच उनके तापान्तर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानान्तरित होती है। स्थानान्तरण के समय ही यह ऊर्जा ऊष्मा कहलाती है। जूल नामक वैज्ञानिक ने अपने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया है कि ‘‘ऊष्मा ऊर्जा का ही एक रूप है। ऊष्मा का SI मात्रक ‘जूल’ और CGS मात्रक ‘कैलोरी’ होता है। जब तरल और उसके आसपास के बीच का तापमान अंतर दुगुना हो जाता है तो ऊष्मा की हानि दर दुगुनी हो जाती है क्योंकि ∆ैं ∝ ∆ू
Concept note किसी पदार्थ की इकाई मात्रा का ताप एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता कहा जाता है। उदाहरण पानी की विशिष्ट ऊष्मा धारिता · 4181.3 व् व्ु-1ख्-1 होती है। अत: विकल्प (a) गलत है।
Concept note सूर्य, पृथ्वी को ‘विकिरण’ द्वारा ऊष्मा प्रदान करता है। पृथ्वी के पृष्ठ पर प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का अधिकतम अंश (भाग) लघु तरंग दैर्ध्य के रूप में आता है। पृथ्वी को प्राप्त होने वाली ऊर्जा को ‘आगामी सौर विकिरण’ या छोटे रूप में ‘सूर्यातप’ कहते है। विकिरण द्वारा ऊष्मा ऊर्जा क संरचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
Concept note पदार्थ में ताप परिवर्तन के दौरान ऊष्मा ऊर्जा गतिज ऊर्जा के रूप में संग्रहित रहती है। चूँकि अवस्था परिवर्तन में पदार्थ का ताप नहीं बदलता है अत: पदार्थ के अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा नहीं बदलती है लेकिन अणुओं की आंतरिक स्थितिज ऊर्जा के रूप में संभावित ऊष्मा संग्रहित रहती है।
Concept note ऊष्मीय ऊर्जा एक प्रकार की आंतरिक ऊर्जा होती है। ऊष्मा इंजन ऊष्मीय ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरित करता है। ध्यातव्य है कि ऊष्मीय ऊर्जा की एक कैलोरी यांत्रिक ऊर्जा के लगभग 4.2 जून के बराबर होती है। (ग्ग्ग्) ऊष्मीय प्रसार
Concept note तापीय प्रसार के गुण के कारण गर्मियों के दौरान एफिल टॉवर की लम्बाई बढ़ जाती है। जब किसी पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है तो ऊष्मा पाकर उस पदार्थ के अणुओं के मध्य की दूरी बढ़ जाती है। अणुओं के बीच की दूरी बढ़ने से पदार्थ की लम्बाई, चौड़ाई तथा आयतन में वृद्धि होने अर्थात पदार्थ के फैलने की घटना को ही पदार्थ का ऊष्मीय या तापीय प्रसार कहते हैं। ऊष्मीय या तापीय प्रसार के गुण को देखते हुए रेल की पटरियों के जोड़ों के बीच थोड़ी सी जगह छोड़ दी जाती है। (ग्न्) संवहन (ण्दहनम्ूग्दह)
Concept note वातावरण के भीतर वायु के क्षैतिज संचलन से होने वाला ऊष्मा का स्थानान्तरण अभिवहन कहलाता है। वायु का क्षैतिज संचालन लम्बवत् संचालन की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण होता है। क्योेंकि मध्य अक्षांशों में दैनिक मौसम में आने वाली भिन्नताएँ केवल अभिवहन के कारण होती हैं।
Concept note दिये गये विकल्पों में काँच सबसे बढि़या कुचालक है। काँच विभिन्न क्षारीय धातुओं के सिलिकेटों का पारदर्शी, अक्रिस्टलीय समांगी मिश्रण है। ठोसों एवं काँच में प्रमुख अन्तर यह है कि काँच का कोई निश्चित गलनांक नही होता। कांच में क्यूलेट (ण्ल्त्तू) मिला देने पर वह आसानी से पिघलता है व पोटैशियम क्लोराइड मिला देने से इसकी कठोरता में वृद्धि हो जाती है। कांच का सर्वप्रथम निर्माण मिश्र में हुआ था।
Concept note बुरादे से ढकी हुई बर्फ जल्दी से इसलिए नही पिघलती कि बुरादे के कणों के मध्य हवा की परत होती है। जो ऊष्मा की कुचालक होता है। जिससे अन्दर की ऊष्मा बाहर नही जा पाती फलस्वरूप बर्फ का तापमान नियत बना रहता है। (न्ग्) ऊष्मागतिकी
Concept note उष्मागतिकी में किसी निकाय में अंतर्विष्ट ऊर्जा को उस निकाय की आंतरिक ऊर्जा कहते हैं। किसी निकाय में उपस्थित कार्यकारी पदार्थ के अणुओं की गति में स्थानांतरण, घूर्णीय एवं कंपन गति से निकाय की आन्तरिक ऊर्जा बढ़ेगी।
Concept note रेडियो तरंगो का विकिरण लगभग 300 उप्ैर् से 3 व्प्ैर् की आवृत्ति वाले या समतुल्य लगभग 1 स्स् से 100 व्स् तक की तरंगदैर्ध्य वाले विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के एक भाग को निर्दिष्ट करता है। रेडियो तरंगे विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं राडार में रेडियों तरंगों का प्रयोग वस्तुओं की स्थिति तथा उपस्थिति ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
Concept note कैथोड किरणे विद्युत–चम्बकीय तरंग नही है, एक्स–रे विद्युत–चम्बकीय तरंग है, कैथोड किरणे अदृश्य होती है, और सीधी रेखा में चलती है, कैथोड किरणे ऋणात्मक होती है, इसलिए ये कैथोड से एनोड की तरफ गमन करती है, ये इलेक्ट्रॉन की बनी होती है, और अपनी सतह से लम्बवत् निकलती है। अवरक्त किरणें पदार्थो को उच्च ताप पर गर्म करने पर निकलती है। एक्स किरणों का उपयोग चिकित्सा एवं औद्योगिक क्षेत्र में बहुत होता है।
Concept note वैज्ञानिक – इनके सिद्धान्त क्रिश्चियन हाइगेंस– प्रकाश का तरंग सिद्धान्त नील बोर – परमाणु संरचना का सिद्धान्त जे.जे. थॉमसन – इलेक्ट्रॉन की खोज माइकल फैराडे – विद्युत अपघटन का नियम
Concept note अवरक्त तरंगों (वैद्युत चुम्बकीय तरंगों) का संसूचन थर्मोपाइल का उपयोग करके किया जाता है। इस तरंग की खोज हर्शेल ने किया था। इसकी तरंगदैर्ध्य परिसर 7.8×10–7 स् से 5×10–3स् तक है और इसकी आवृत्ति परिसर 4×1014 से 6×1010हर्ट्ज तक होती है। ये किरणें ऊष्मीय विकिरण हैं। ये जिस वस्तु पर पड़ती हैं उसका ताप बढ़ जाता है। इन तरंगों का उपयोग कुहरे में फोटोग्राफी करने में, रोगियों की सिंकाई करने में, TV के रिमोट कण्ट्रोल में किया जाता है।
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