Correct answer: दीर्घ रेडियो तरंगेंष्सूक्ष्म तरंगें ष् दृश्य प्रकाश ष् एक्स रे
Concept note विद्युत चुम्बकीय तरंगें आवृत्ति परिसर (प्ैर् में) 1. दीर्घ रेडियों तरंगे - 3×109 – 3×104 तक 2. लघु रेडियों तरंगे - 3×1011 – 1×109 तक 3. दृश्य प्रकाश - 8×1014 – 4×1014 तक 4. एक्स-रे - 3×1019 – 1×1016 तक 5. गामा किरणें - 3×1022 – 3×1018 तक इस प्रकार दिए गये विकल्प में आवृत्ति का बढ़ता क्रम निम्न होगा- दीर्घ रेडियो तरंग ष् सूक्ष्म रेडियो तरंगे ष् दृश्य प्रकाश ष् एक्स-रे।
Concept note सूक्ष्म तरगों की खोज हेनरिक हर्ट्ज ने की थी अत: इन्हें हर्ट्जियन तरंगे तथा लघु रेडियो तरंगे भी कहते है इनकी तरंग दैर्ध्य 1.0×10–3 मी. से 3.0×10–1 मी. तथा आवृत्ति 3×1011 से 1 × 109 हर्ट्ज तक होती है। इन तरंगों का संसूचन (पहचान) बिन्दु संपर्क डायोड का उपयोग करके किया जाता है। इन तरंगों में परावर्तन एवं ध्रुवण की घटनाएं भी होती है। इनका उपयोग विमान संचालन में रडार प्रणाली के लिए होता है।
Concept note प्रकाश एक प्रकार की विद्युत चुम्बकीय विकिरण है, प्रकाश मूलत: फोटॉन का रूप है। दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य सीमा 400 हस् − 700 हस् के बीच होती है; अर्थात् इसी तरंगदैर्ध्य सीमा की विकिरणों को हम देख सकते हैं। जबकि X-किरणों की तरंगदैर्ध्य सीमा 1×10−10स् से 3×10−8स्, सूक्ष्म तरंगों की तरंग दैर्ध्य सीमा 1×10−3स् से 1 मी. तक एवं रेडियो तरंगों की तरंग दैर्ध्य सीमा 1×10–1 मी. से 1×104 मी. के बीच होती है।
Concept note गीगर ट्यूब एक गैसीय आयनीकरण डिटेक्टर है। इसका उपयोग गामा विकिरण, एक्सरे और अल्फा और बीटा कणों के संसूचन के लिए किया जाता है। इसका नाम हैंस गीगर के नाम पर रखा गया था जिन्होंने 1908 में इस सिद्धान्त का आविष्कार किया।
Concept note अवरक्त तरंग गर्म पिंडो एवं अणुओं से उत्पन्न होती है। यह बैंड दृश्य स्पेक्ट्रम के निम्न आवृत्ति या दीर्घ तरंगदैर्ध्य सिरे से संलग्नित होती है। अवरक्त तरंगों को कभी-कभी ‘ऊष्मा तरंगें’ भी कहा जाता है। ऐसा इसलिये है, क्योंकि अधिकांश पदार्थों में विद्यमान ‘जल के अणु’ अवरक्त तरंगों को तुरन्त अवशोषित कर लेते हैं।
Concept note रेडियो संसूचन एवं सर्वेक्षण को संक्षिप्त रूप में रडार कहते हैं इसके द्वारा सूक्ष्म रेडियों, तरंगों की सहायता से आकाशगामी वायुयान की स्थिति एवं दूरी का पता लगाया जाता है। रडार से प्रेषित और वायुयान से परावर्तित इन तरंगों के मध्य समयान्तर को ज्ञात करके वायुयान की दूरी ज्ञात की जा सकती है। रडार के आविष्कार का श्रेय रॉबर्ट वाट्सन को प्राप्त है। 7. ध्वनि (एदल्ह्) ध्वनि तरंगों की प्रकृति (i)
Concept note ध्वनि कंपन करती हुई वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है। द्रव्य या पदार्थ जिससे होकर ध्वनि संचारित होती है, माध्यम कहलाता है। यह ठोस, द्रव या गैस हो सकता है। श्रोत से उत्पन्न होकर ध्वनि सुनने वाले तक किसी माध्यम से होकर पहुँचती है। निर्वात में कोई माध्यम नहीं होता इसलिए निर्वात में ध्वनि यात्रा नहीं कर सकती।
Concept note ध्वनि तरंगों को संचरित होने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। ध्वनि तरंगे ठोस, द्रव तथा गैस तीनों में संचरित हो सकती हैं जबकि ध्वनि तरंगें-निर्वात में गमन नहीं कर सकती है। किसी माध्यम में ध्वनि की चाल केवल माध्यम के गुणों (प्रत्यास्थता, घनत्व आदि) पर निर्भर करती है। ध्वनि की चाल गैसों में सबसे कम, द्रव में इससे अधिक तथा ठोस में सर्वाधिक होती है।
Concept note पराश्रव्य तरंगे – वे ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्ति 20ख्प्ैर् से अधिक होती है। मनुष्य के कान इसे नहीं सुन सकते है परन्तु कुछ जानवर जैसे-कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ आदि इसे सुन सकते है। इन तरंगों की आवृत्ति बहुत ऊँची होने के कारण इसमें बहुत अधिक ऊर्जा होती है। साथ ही इनकी तरंगदैर्ध्य छोटी होने के कारण इन्हें एक पतले किरण पुंज के रूप में बहुत दूर तक भेजा जा सकता है।
Concept note वायु में संचारित ध्वनि तरंगे अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें होती है। ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए माध्यम (ठोस, द्रव अथवा गैस) की आवश्यकता होती है। निर्वात में ध्वनि तरंगों का संचरण नहीं हो सकता है। 20 हर्ट्ज से कम की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अपश्रव्य तरंगें कहते है। इन्हें हमारे कान सुन नहीं सकते है। 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज के बीच की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को श्रव्य तरंगें कहते हैं। एक औसत व्यस्क व्यक्ति के लिए ध्वनि की श्रव्य सीमा 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज के बीच होती है। 20000 हर्ट्ज की आवृत्ति से ऊपर की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगे पराश्रव्य तरंगे कहलाती है। मनुष्य के कान इसे नहीं सुन सकते है।
Correct answer: ध्वनि की गति प्रकाश की गति से बहुत कम है।
Concept note बिजली की चमक को बिजली की गड़गड़ाहट से पहले देखा जाता है क्योंकि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक है अर्थात ध्वनि की गति प्रकाश की गति से बहुत कम होती है। निर्वात में प्रकाश की चाल 300000 किमी. प्रति सेकेण्ड या (300000,000 मीटर/सेकेण्ड) होती है जबकि 0ड्ढण् तापमान पर ध्वनि की चाल 332 मीटर/सेकेण्ड होती है।
Concept note मनुष्य के कानों से महसूस होने वाली आवाज को ध्वनि कहा जाता है। ध्वनि की आवृत्ति को हर्ट्ज में मापा जाता है। 1 हर्ट्ज प्रति सेकण्ड 1 कंपन के बराबर होता है। ज्ञातव्य है कि 1 सेकण्ड में किए गए दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहा जाता है। ध्वनि की तीव्रता को डेसीबल में मापा जाता है। ध्वनि की तरंग दैर्ध्य का S.I. मात्रक मीटर है।
Concept note ध्वनि तरंग– ध्वनि तरंगे अनुदैर्ध्य तरंगे होती है। यह सम्पीडन और विरलन से बनती है। ध्वनि तरंगों को संचरण के लिये माध्यम की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगे कहते है। ध्वनि तरंगो के अभिलक्षण– आवृत्ति, आयाम (Aस्ज्त्ग्ूल्), वेग (न्नत्दम्ग्ूब्), तरंगदैर्ध्य.
Concept note किसी तार वाले वाद्य यन्त्र से पैदा हुयी संगीत की ध्वनि की गुणवत्ता ध्वनि की तरंग के रूप पर निर्भर करती है। ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य तरंगे होती है। इसकी उत्पत्ति वस्तुओं में कम्पन होने से होती है। जिन तरंगो की आवृत्ति लगभग 20 कम्पन प्रति सेकेण्ड से 20,000 कम्पन प्रति सेकेण्ड के बीच होती है। उनकी अनुभूति हमे अपने कानों द्वारा होती है और उन्हें हम सुन सकते हैं।
Concept note नाइट्रोजन गैस, तार (फिलामेंट) के जीवनकाल को बढ़ाने के लिए तापदीप्त बल्बों में भरी जाती है। यह रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है, इस गैस की मात्रा वायुमण्डल की सभी गैसों में सबसे ज्यादा होती है। रासायनिक दृष्टि से नाइट्रोजन निष्क्रिय तत्व है। जो साधारण ताप पर न तो जलती है और न अन्य धातुओं से यौगिक ही बनाती है। उच्च ताप पर यह गैस अनेक तत्वों जैसे लीथियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, बोरॉन आदि से क्रिया करके नाइट्राइड जैसे यौगिक बनाती है। ज्ञातव्य है कि नाइट्रोजन वायुमण्डल में 78.5% मात्रा में उपस्थित है। (v) प्रतिध्वनि (Eम्प्द)
Concept note सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते है। सूर्य का श्वेत प्रकाश सात रंगों का मिश्रण है, जो इस प्रकार है- बैगनी, नीला, जामुनी, हरा, पीला, नारंगी और लाल। बैंगनी प्रकाश की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है जबकि लाल की सबसे अधिक होती है। सूर्य के श्वेत प्रकाश की किरण में समाहित सात रंगों की खोज न्यूटन ने की है।
Concept note सूर्य के प्रकाश की लाल और हरे रंग की तरंगदैर्ध्य के अलावा, महासागरों में जल के अणुओं द्वारा, सूर्य के प्रकाश की पीली रंग की तरंग दैर्ध्य को भी अवशोषित किया जाता है।
Concept note विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम प्रकाश की पूरी शृंखला का वर्णन करता है जिसे आम तौर पर तरंग दैर्ध्य के सात क्षेत्रों में और ऊर्जा और आवृत्ति में वृद्धि के क्रम में विभाजित किया जाता है।
Concept note प्रकाश के सात रंगों में से लाल, नीला तथा हरा प्राथमिक रंग कहे जाते हैं क्योंकि उन्हें विभिन्न अनुपात में मिलाने से अन्य सभी रंग प्राप्त होते हैं। जैसे- लाल, हरा व नीला रंगो को बराबर अनुपात में मिलाने से श्वेत रंग प्राप्त होता है। ध्यातव्य है कि लाल, हरे व नीले रंगों के प्रयोग से ही टेलीविजन में विभिन्न रंग प्राप्त होते हैं।
Concept note जो वस्तुएँ सूर्य की तरह स्वयं प्रकाश का उत्सर्जन करती है, उन्हें दीप्त पिण्ड/ वस्तु कहा जाता है। जैसे- सूर्य, तारे, टार्च आदि।
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