Concept note भूकंपमापी (सिस्मोग्राफ) भूगति के एक घटक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विधि से अभिलिखित करने वाला उपकरण हैं। इसका उपयोग प्राकृतिक भूकंपों, भूमिगत परमाणु परीक्षण एवं पेट्रोलियम अन्वेषण आदि में मनुष्यकृत विस्फोटों तथा तेज हवा, समुद्री तरंग, तेज मानसून एवं समुद्री क्षेत्र में तूफान या अवनमन आदि से उत्पन्न सूक्ष्म कंपनो का पता लगाने में किया जाता है।
Concept note वायु में भार होता है और इसी कारण पृथ्वी के ऊपर विस्तृत वायुमण्डल हमारे ऊपर निरंतर, चतुर्दिश दबाव डालता है। इसी दाब को सन्तुलित करने और इसे नापने के लिए टॉरीसोली नामक वैज्ञानिक ने वायुदाब मापी का अविष्कार किया। इसकी सहायता से मौसम से सम्बन्धित पूर्वानुमान भी लगाया जाता है। बैरोमीटर का पाठ्यांक जब एकाएक नीचे गिरता है तो तूफान तूफान और वर्षा के संकेत मिलता है एवं जब धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता है तो दिन साफ रहने की संभावना होती है।
Concept note दूध का विशिष्ट गुरुत्व मापने के लिये हाइड्रोमीटर का उपयोग करते है। इसे द्रव घनत्वमापी भी कहते है। हाइड्रोमीटर इस सिद्धान्त पर आधारित है कि द्रव में अंशत: डूबे हुऐ और संतुलित पिंड का भार उतने द्रव के भार के बराबर है, जो पिंड का डूबा हुआ भाग विस्थापित करता है।
Concept note सोनोमीटर - इसका उपयोग सुनने की संवेदनशीलता मापने के लिए किया जाता है। मैनोमीटर - इस उपकरण का उपयोग गैसों के दाब मापने के लिए किया जाता है। गैल्वेनोमीटर - इसका उपयोग विद्युत परिपथ में धारा का पता लगाने के लिए करते हैं।
Concept note जिस भौतिक राशि में मात्रा (परिमाण) तथा दिशा दोनों निहित होते है, उन्हें सदिश राशि कहते है। सदिश राशियों के उदाहरण बल, वेग संवेग इत्यादि है। अत: दो सदिश राशियाँ बराबर होंगे जब उनके परिमाण और दिशा दोनों समान (एक ही) हो।
Concept note वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है दिशा की नहीं उन्हें अदिश राशियाँ कहते हैं। इन राशियों को गणित के साधारण नियमों द्वारा जोड़ा, गुणा, भाग तथा घटाया जा सकता है। जैसे– यंग का मापांक, द्रव्यमान, आयतन, ताप, समय, दूरी।
Concept note तापमान, आयतन व समय अदिश राशि के उदाहरण है जबकि बलाघूर्ण एक सदिश राशि है। किसी बल द्वारा किसी वस्तु को किसी अक्ष के परित: घुमाने की प्रवृत्ति को बलाघूर्ण कहते हैं। जिन भौतिक राशियों को पूर्णतया निरूपित करने हेतु परिमाण के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है वे सदिश राशियाँ कहलाती है। वे राशियाँ जिनको पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है परन्तु दिशा की आवश्यकता नहीं होती है वे अदिश राशियाँ कहलाती है।
Concept note कार्य एक अदिश राशि है। भौतिकी में कार्य होना तब माना जाता है जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाने से वह वस्तु बल की दिशा में कुछ विस्थापित हो। दूसरे शब्दों, में, कोई बल लगाने से बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन हो तो कहते हैं कि बल ने कार्य किया। जिस भौतिक राशि में मात्रा (परिमाण) तथा दिशा दोनो निहित होते हैं उन्हें सदिश राशि कहते है, जिन राशियों में सिर्फ परिमाण होता है दिशा नहीं उन्हें अदिश राशि कहते हैं।
Concept note किसी वस्तु पर बल आरोपित करने पर यदि उसके वर्तमान स्थिति में परिवर्तन हो जाता है तो उसे कार्य कहते है। किया गया कार्य धनात्मक या ऋणात्मक कुछ भी हो सकता है लेकिन वस्तु की वर्तमान स्थिति में परिवर्तन नहीं हुआ तो कार्य शून्य होगा। यह एक अदिश राशि है। (ग्ग्) शक्ति (झ्दैी)
Concept note गुरूत्वीय स्थितिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु के पास गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में उसकी विशेष स्थिति के कारण होती है। एक जलविद्युत बांध के पीछे का पानी गुरुत्वाकर्षण संभावित स्थितिज ऊर्जा को संग्रहीत करता है। क्योंकि यह बांध के दूसरी तरफ के पानी की तुलना में अधिक ऊँचाई पर होता है। झरने के रूप में ऊपर से नीचे की ओर गिरते समय बांध के पानी की यह संभावित गुरूत्वीय स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है, जो बिजली उत्पन्न करने के लिए टर्बाइनों की शॉफ्ट को घुमाती है।
Concept note किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को उस वस्तु की ऊर्जा कहते हैं, ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है न ही नष्ट किया जा सकता है वरन ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। ऊर्जा का मात्रक जूल होता है। ऊर्जा दो प्रकार की होती है– गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा
Correct answer: गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण
Concept note यांत्रिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण - विद्युत जनित्र गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (बांध में संग्रहित जल की ऊर्जा) का विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण - जल विद्युत उत्पादन रासायनिक ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण - अन्तर्दहन इंजन विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण - विद्युत मोटर (ग्न्) द्रव्यमान
Concept note 1687 में प्रकाशित, फिलॉसफी नेचुरलिस प्रिंसिपिया मैथमेटिका जिसे प्रिंसिपिया के नाम से भी जाना जाता है, आइजैक न्यूटन की महान कृति है, जिसमें न्यूटन द्वारा गुरूत्वाकर्षण एवं गति के नियमों की व्याख्या की गई है।
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