Concept note भारत के संविधान का अनुच्छेद 18 उपाधियों के उन्मूलन से संबंधित है। अनुच्छेद 5– संविधान के प्रारम्भ में नागरिकता। अनुच्छेद 26– धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता। अनुच्छेद 43– राज्य सभी को काम देने के लिए कुटीर उद्योगों का विकास करेगा। अनुच्छेद 40– राज्य पंचायतों का गठन करेगा।
Concept note कानून के समक्ष समानता तथा विधियों (कानून) का समान संरक्षण अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त मूल अधिकार है। इसके तहत राज्य भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि (कानून) के समक्ष समता के या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह नागरिक हो या विदेशी, किसी को भी इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। विधि के समक्ष समता ब्रिटेन से तथा विधियों का समान संरक्षण अमेरिकी संविधान से लिया गया है।
Concept note अनुच्छेद–361 (राष्ट्रपति या राज्यपालों तथा राज्य प्रमुखों का संरक्षण): राष्ट्रपति या राज्यपाल या किसी राज्य का प्रमुख अपने कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों के पालन और उसके द्वारा किये जाने वाले किसी भी कार्य के लिये किसी न्यायालय में जवाबदेह नहीं होंगे। अनुच्छेद–361 के तहत इसे राष्ट्रपति या राज्यपाल के खिलाफ जारी नहीं किया जा सकता है।
Concept note भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74(1) में राष्ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करेंगे, जबकि अनुच्छेद 75 में मंत्रियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल, जिम्मेदारी, शपथ, योग्यता एवं मंत्रियों के वेतन और भत्ते से संबंधित है।
Concept note अनुच्छेद 98– संसद का सचिवालय अनुच्छेद 100– सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुये भी सदनों की कार्य शक्ति और गणपूर्ति अनुच्छेद 102– सदस्यता के लिये निरर्हतायें (भारत सरकार के अंतर्गत लाभ का पद (Office of profit) रखने के लिये संसद के किसी भी सदन के सदस्य की अयोग्यता के संबंध में विवरण प्रदान करता है।) अनुच्छेद 104– अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुये या निरर्हित किये जाने पर बैठने और मत देने के लिये शक्ति
Concept note अनुच्छेद 18–(उपाधियों का अंत)–(1) सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाएगी। (2) भारत का कोई भी नागरिक किसी अन्य देश में बिना राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं का सकता।
Concept note भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान किया गया है। एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। अनुच्छेद 157 तथा 158 के तहत राज्यपाल पद के लिए पात्रता संबंधी आवश्यकताओं को निर्दिष्ट किया गया है। अनुच्छेद 164 के द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। अनुच्छेद 213 के माध्यम से राज्यपाल कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में अध्यादेशों को प्रख्यापित कर सकता है।
Concept note भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का अनुच्छेद 50 न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करता है, ‘‘राज्य, राज्य की सार्वजनिक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने के लिए कदम उठाएगा और इसके अलावा शक्ति के विभाजन की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है।’’ अनुच्छेद 47 - पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य। अनुच्छेद 37 - DPSP संबंधी प्रावधान किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं किया जा सकता, लेकिन निहित सिद्धांत शासन व्यवस्था में मौलिक प्रकृति के होंगे। अनुच्छेद 57 - राष्ट्रपति के पुन:निर्वाचन के लिए पात्रता शर्त।
Concept note अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचार के अधिकार से संबन्धित है या संविधान के भाग III में प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपर्युक्त कार्यवाही द्वारा सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार की पुष्टि करता है।
Concept note भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 के माध्यम से ही ऐसे किसी कानून बनाने से संसद और राज्य विधानसभाओं पर प्रतिबन्ध लगाता है जो नागरिकों को प्रदत्त मौलिक अधिकारोें में कटौती करता हो या उनसे वंचित करता है। इसके प्रावधान मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु है और ऐसे किसी भी कानून को शून्य घोषित करता है जो मौलिक अधिकारों की अवमानना करते हो या इनके साथ असंगत हो।
Concept note भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 में राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है, जिनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नाम-निर्देशित किये जाते हैं और 238 सदस्य राज्यों के और संघ राज्यक्षेत्र के प्रतिनिधि होते हैं। राज्यसभा के सदस्यों की वर्तमान संख्या 245 (233 + 12) है।
Concept note 17 अक्टूबर, 1949 ई. को अनुच्छेद 370, भारतीय संविधान का हिस्सा बना तथा इसे एक ‘अस्थायी प्रावधान’ के रूप में जोड़ा गया था। जिसने जम्मू-कश्मीर को छूट दी थी, ताकि वह अपने संविधान का मसौदा तैयार कर सकें और राज्य में भारतीय संसद की विधायी शक्तियों को प्रतिबंधित कर सके। यह संविधान के प्रारूप में एन गोपालस्वामी अय्यंगार द्वारा प्रस्तुत किया गया था। ध्यातव्य है कि भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में पेश किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के दो केन्द्र शासित प्रदेशों के रूप में करने का कानून बनाया गया।
Concept note भारतीय संविधान के प्रमुख अनुच्छेद- अनुच्छेद-153- प्रत्येक राज्य के लिये एक राज्यपाल होगा। परन्तु एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। अनुच्छेद-148- भारत का नियंत्रक-महालेखा परीक्षक। अनुच्छेद-136- अपील के लिये उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत। अनुच्छेद-124- उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन।
Concept note राज्य अपनी नीति का इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से– (i) पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो (ग्ग्) समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बटा हो जिससे सामूहिक हित का सर्वोत्तम रूप से साधन हो। (ग्ग्ग्) आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले जिससे धन और उत्पादन साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी सकेन्द्रण न हो। (ग्न्) पुरुषों और स्त्रियों दोनों का समान कार्य के लिए समान वेतन हो, आदि।
Concept note भारतीय संविधान के भाग-17 (अनुच्छेद 343-351) के अनुच्छेद 343(1) में यह उल्लिखित है कि संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। अनुच्छेद 344 - राजभाषा आयोग। अनुच्छेद 348 - न्यायालयों तथा विधेयकों की भाषा का उल्लेख।
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