Concept note धौलावीरा, हड़प्पा सभ्यता से संबंधित स्थल है। इसकी खोज वर्ष 1968 में पुरातत्वविद् जगपति जोशी द्वारा की गई थी। यह स्थल तीन भागों में विभक्त होने के साथ अपने उन्नत जल प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में यूनेस्कों ने गुजरात के धौलावीरा शहर को भारत के 40वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया है।
Concept note राजस्थान की अरावली की पहाड़ियों में बसा खेतड़ी हजारों साल से तांबा उत्खनन का केन्द्र रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता (२३५० ईसा पूर्व) में जब ताम्र पाषाण युग की शुरुआत हुई तब भी यहां से तांबा प्राप्त होता था। सिंधु घाटी सभ्यता के लोग कांसे, तांबे, चांदी और सोने से परिचित थे लेकिन लोहे के बारे में नहीं जानते थे।
Concept note बनावली हड़प्पा स्थल से टेराकोटा का हल प्राप्त हुआ था। यह हरियाणा के हिसार जिले में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। जो रंगोई नदी के तट पर स्थित था। इसका उत्खनन वर्ष 1973- 74 में आर. एस. विष्ट द्वारा करवाया गया था।
Concept note धौलावीरा शहर गुजरात राज्य के कच्छ के रण में एक पुरातात्विक स्थल है। हड़प्पा संस्कृति के इस नगर की खोज पुरातत्वविद् जगपति जोशी ने सर्वप्रथम वर्ष 1967-68 में की और 1990-91 के दौरान आर. एस. बिष्ट के द्वारा इसका उत्खनन कराया गया।
Concept note धौलावीरा गुजरात के कच्छ के रण में स्थित है जिसकी खोज वर्ष १९६८ में जगपत जोशी ने की। जबकि लोथल जो एक बंदरगाह स्थल था जो गुजरात मे खम्भात की खाड़ी के निकट भोगवा नदी के किनारे स्थित है तथा इसकी खोज रंगनाथ राव ने वर्ष १९५१ में की थी।
Concept note हड़प्पा स्थल कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं। कालीबंगन राजस्थान में घघ्घर नदी के तट पर स्थित है। इस स्थल की खोल बी०बी० लाल एवं बी०के० थापर ने की थी। कालीबंगा एकमात्र हड़प्पाकालीन स्थल था, जिसका निचला शहर भी रक्षा प्राचीर दीवारों से घिरा हुआ था। कालीबंगा से अग्नि पूजा की प्रथा के भी प्रमाण मिले हैं।
Concept note मेसोपोटामिया सभ्यता का विकास दजला एवं फरात नदियों के किनारे, वर्तमान इराक और कुवैत के क्षेत्र में हुआ था। मेसोपोटामिया विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता वाला स्थान है, इसे कांस्ययुगीन सभ्यता का उद्गम स्थल माना जाता है। यहाँ सुमेर, अक्काद, बेबीलोन तथा असीरिया के साम्राज्य अलग-अलग समय में स्थापित हुए थे। एमोराइट, एलामाइट और अकाडियन मेसोपोटामियन भाषा थी। यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था।
Concept note रंगपुर गुजरात राज्य में भादर नदी के समीप स्थित है। इस स्थल की खुदाई वर्ष 1953-54 में ए. रंगनाथ राव द्वारा की गई थी। यहाँ पर पूर्व हड़प्पा कालीन संस्कृति के अवशेष मिले है। रंगपुर से कच्ची ईटों के दुर्ग, नालियाँ, मृदभाण्ड, बाट, पत्थर के फलक आदि महत्वपूर्ण है। यहाँ धान की भूसी के ढेर मिले है।
Concept note सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है, क्योकि इसके प्रथम अवशेष हड़प्पा नामक स्थल से प्राप्त हुये थे तथा इसके आरम्भिक स्थलों में से अधिकांश सिंधु नदी के किनारे अवस्थित थे। यह भारतीय उपमहाद्वीप में ‘प्रथम नगरीय क्रान्ति की अवस्था’ को दर्शाती है। सिन्धु घाटी सभ्यता के घर आमतौर पर एक या दो मंजिले होते थे। घर के आंगन के चारों ओर कमरे बनाये जाते थे। अधिकांश घरों में एक अलग स्नानघर होता था, और कुछ घरों में कुएँ भी होते थे।
Concept note हड़प्पा कालीन स्थल लोथल, कालीबंगा से अग्निवेदिकाएँ प्राप्त हुई है। इन अग्नि वेदिकाओं का प्रयोग सम्भवत: यज्ञ - वेदिकाओं के रूप में होता होगा। लोथल गुजरात के अहमदाबाद जिले में भोगवा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ से गोदीवाड़ा के साक्ष्य मिले है। लोथल को ‘लघु हड़प्पा’ या लघु मोहनजोदड़ो भी कहा जाता है। लोथल की खोज एस.आर.राव द्वारा 1954 ई. में की गयी थी।
Concept note मेसोपोटामिया सभ्यता का विकास टिगरिस-यूफ्रेटस (दजला-फरात) नदियों के किनारे वर्तमान इराक और कुवैत के क्षेत्र में हुआ। सिंधु सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में विकसित हुई। मेसोपोटामिया सभ्यता के लोग सिंधु सभ्यता को ‘मेलुहा’ कहकर पुकारते थे।
Concept note धौलावीरा शहर हड़प्पा सभ्यता के अन्य शहरों के विपरीत एक मात्र ऐसा स्थल था जहाँ शहर को तीन भागों दुर्ग, मध्यम नगर तथा निचले नगर में विभाजित किया गया था तथा प्रत्येक भाग विशाल पत्थर की दीवारों से घिरा था। हाल ही में यूनेस्को ने गुजरात के धौलावीरा शहर को भारत के ४० वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया है। यह प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाली सिन्घु घाटी सभ्यता का पहला स्थल है।
Concept note हरियाणा के जीन्द जिले में प्राचीन सरस्वती के तट पर स्थित राखीगढ़ी की खोज १९६९ ई. में सूरजभान ने की थी। यह हड़प्पा सभ्यता का सबसे विशाल नगर है। इस स्थल से मनकों को चिकना करने का घर्षण पत्थर, हाथी दाँत, बारहसिंहा के सींग मनका बनाने की कार्यशाला आदि प्राप्त हुए हैं।
Concept note हड़प्पा सभ्यता की प्रसिद्ध नृत्य करती हुई लड़की काँसे की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई है। इस लड़की का दाहिना हाथ उसके कुल्हे पर जबकी बायां हाथ लटकते हुए दर्शाया गया है। इसके हाथ में सम्भवत: हड्डी से बनी चूड़ियाँ है। मूर्ति बनाने के लिए मधुद्दिष्ट विधि का प्रयोग किया गया है।
Concept note सिंधु सभ्यता का पुरातात्विक स्थल दैमाबाद गोदावरी नदी की सहायक प्रवरा नदी के तट पर स्थित है, जो भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर जिले में है। यह स्थान बी.पी. बोपर्दिकर द्वारा खोजा गया था। यह सिन्धु सभ्यता का सबसे दक्षिणतम स्थल है।
Concept note सिन्धु घाटी सभ्यता के खोजे गए स्थलों में सर्वप्रथम हड़प्पा की खोज की गई थी। इसीलिए इसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ भी कहते हैं। हड़प्पा की खोज 1921 ई. में दयाराम साहनी द्वारा की गई थी। हड़प्पा पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में माण्टगोमरी (आधुनिक शाहीवाल) जिले में रावी नदी के बाएँ तट पर स्थित है।
Concept note बनावली हरियाणा के हिसार जिले में रंगोई नदी के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण हड़प्पाकालीन स्थल है। इसकी खोज 1973 ई. में आर.एस. विष्ट ने की। बनावली से मिट्टी के बर्तन, तांबे के बाणाग्र, हल का टेराकोटा और बढ़िया किस्म के जौ आदि पुरातात्विक वस्तुएं प्राप्त हुई हैं। यहाँ के मकानों से पता चलता है कि यह समृद्ध लोगों का नगर था। यहाँ के कई मकानों से अग्निवेदियाँ भी प्राप्त हुई हैं।
Concept note अहमदाबाद जिले (गुजरात) में भोगवा नदी के तट पर स्थित लोथल की खोज सर्वप्रथम डा. एस.आर.राव ने 1954 में की थी। इसे ‘लघु हड़प्पा’ या ‘लघु मोहनजोदड़ो’ भी कहा जाता है। लोथल के पूर्वी भाग में एक गोदीबाड़ा का साक्ष्य मिला है। यह बन्दरगाह मेसोपोटामिया के साथ समुद्री रास्ते से व्यापार करने के लिए प्रमुख केन्द्र था। यहाँ से उपलब्ध फारस की मुद्रा या सील और पक्के रंग में रगें हुये पात्र इसकी पुष्टि करते है।
Concept note हड़प्पाई स्थल ‘मांडा’ अखनूर जिला (जम्मू) में चेनाब नदी के दायें तट पर स्थित था। जबकि हड़प्पा ‘रावी’ नदी के, मोहनजोदड़ो, चन्हूदड़ो एवं कोटदीजी ‘सिन्धु’ नदी के तथा रोपड़ ‘सतलज’ नदी के तट पर स्थित है। ध्यातव्य है कि उत्तर में सिंधु सभ्यता का अंतिम बिन्दु माण्डा है जो जम्मू में स्थित है तथा दक्षिणतम बिन्दु दैमाबाद है। माण्डा इमारती लकड़ियों के लिए प्रसिद्ध था।
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