Concept note मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी ईमारत ग्रेट ग्रैनरी (विशाल अन्नागार) थी। जो पूर्व से पश्चिम 45.72 मी. लम्बा तथा उत्तर से दक्षिण 22.86 मी. चौड़ा है। व्हीलर ने इसे अन्नागार बताया है। इसमें ईंटो के बने विभिन्न आकार-प्रकार के 27 प्रकोष्ठ मिले हैं। परन्तु अन्नागार से अन्न के दानों की प्राप्ति नहीं हुई है। विद्वानों का विचार है यह राजकीय भण्डारागार था जिसमें जनता से कर के रूप में वसूला गया अनाज रखा जाता था। → ग्रेटवाथ (वृहत्स्नानागार) विशाल स्नानागार उत्तर से दक्षिण 54.86 मी. लम्बाई पूरब से पश्चिम लगभग 33 मी. चौड़ा है। इसके केन्द्रीय खुले प्रांगण के बीच जलकुण्ड या जलाशय बना हुआ है। जो 11.89 मी. ल., 7 मी. चौ., 2.44 मी. गहरा है। इसमें उतरने के लिए उत्तर तथा दक्षिण दिशा में सीढ़ीयाँ बनी हुई है। मार्शल ने इसे तत्कालीन विश्व का आश्चर्यजनक निर्माण बताया है। एसेम्बली हाल:- सभाभवन:- यह 27×27 मी. का वर्गाकार भवन है। 20 स्तम्भों वाला यह सभाभवन चार कतारों में है और प्रत्येक कतार में पाँच, पाँच स्तम्भ है। आयताकार भवन:- इसे पुरोहित आवास भी कहते है यह 70.1 मी × 23.77 मी. आकार का है।
Concept note हड़प्पा सभ्यता के स्थलों में लोथल में बन्दरगाह (जहाजों की गोदी Dock yard) मिला है। इसका आकार 214 × 36 मीटर था। इसे नहर द्वारा भोगवा नदी से जोड़ा गया था। इसके उत्तरी दीवार में 12 मी0 चौड़ा एक प्रवेश द्वार था जिससे होकर जहाज आते थे। दक्षिणी दीवार में एक मीटर चौड़ी एक नाली बनाई गयी थी जिससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता था।
Concept note सिन्धु घाटी सभ्यता एक कांस्य कालीन सभ्यता थी। जिसका उद्भव ताम्रपाणाणिक पृष्ठभूमि में आमरी, कोटदीजी, सुरकोटडा, कालीबंगा, कुल्ली-नाल के भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में हुआ था। नवपाषाण युग के अन्तिम चरण में ताम्र धातु का प्रयोग हुआ। इसके वाद (ताँबा + टीन) कांस्ययुग फिर लौहयुग आता है। इस सभ्यता के विषय में सर्वप्रथम जानकारी 1826 में चार्ल्स मैसन ने दी थी। 1921 में दयाराम साहनी ने इस सभ्यता के प्रमुख स्थल हड़प्पा की खोज की।
Concept note सुरकोटदा का पुरातात्विक स्थल गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित है। इस स्थल से हड़प्पा सभ्यता के विस्तार के प्रमाण मिले हैं, तथा इसकी खोज वर्ष 1964 ई. में ‘जगपति जोशी’ ने की थी। इस स्थल में ‘सिधु सभ्यता के पतन’ के अवशेष मिलते है। यहाँ से प्राप्त महत्वपूर्ण अवशेष- घोड़े की अस्थियाँ एवं एक अनोखी कब्रगाह आदि। • लोथल, सिंधु सभ्यता का बन्दरगाह था स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् हड़प्पा संस्कृति के सर्वाधिक स्थल गुजरात राज्य में खोजे गये है।
Concept note मोहनजोदड़ो का सिंधी भाषा में अर्थ ‘मृतको का टीला’ होता है। यह सिंध (पाकिस्तान) के लरकाना जिले में सिंधु नदी के दाहिने तट पर स्थित है। इसकी खोज सर्वप्रथम राखालदास बनर्जी 1922 ई. में की थी। वृहद स्नानागार, मोहनजोदड़ो का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल है। इसके केंद्रीय खुले प्रांगण के बीच जलकुंड या जलाशय बना है।
Concept note सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा बंदरगाह शहर ‘लोथल’ था। लोथल अहमदाबाद जिले (गुजरात) के सरागवाला ग्राम से 80 किमी. दक्षिण से भोगवा नदी के तट पर स्थित हैं। लोथल से जहाजों की गोदीबाड़ा, बन्दरगाह, धान (चावल), बाजरा, फारस की मुहर, घोड़े की लघु मृण्मूर्ति, तीन युगल समाधि आदि साक्ष्य प्राप्त हुएं। यहाँ से मध्यपूर्व एशिया और अफ्रीका तक व्यापार होता था।
Concept note हड़प्पा सभ्यता की पहली खगोलीय वेधशाला ‘धोलावीरा’ में पाई गई थी। धोलावीरा गुजरात के कच्छ के रण में स्थित है। 1968 ई. में जगपति जोशी (जोशी) ने धौलावीरा नामक स्थल की खोज किया।
Concept note सिंधु घाटी सभ्यता का काल 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना जाता है। सिंधु घाटी में खुदाई करने के बाद दो प्राचीन नगर का साक्ष्य मिला। 1. हड़प्पा- 1921 ई. में दयाराम साहनी के नेतृत्व में हड़प्पा नगर की खोज की। 2. मोहनजोदड़ो-इसकी खोज 1922 ई. में राखालदास बनर्जी ने किया था। यह सिंध प्रान्त (पाकिस्तान में) के लरकाना जिले में स्थित है।
Concept note रोपड़, आधुनिक रुपनगर, सिंधु घाटी सभ्यता का ऐतिहासिक स्थल है जो पंजाब में सतलज नदी के किनारे स्थित है। यहां से मिट्टी के बर्तन, ताँबे की अंगुठियाँ कांस्य सेल्टूस, टेराकोटा केक, मानव के साथ कुत्तो को दफनाया जाना तथा तांबे की कुल्हाड़ी प्रमुख साक्ष्य प्राप्त हुए है। शेष सभी विकल्प में दिये गए शहर सिंधु नदी के तट पर स्थित हैं।
Concept note कालीबंगा राजस्थान में स्थित एक परिपक्व-चरण हड़प्पा स्थल है। यह हनुमानगढ़ जिले में सरस्वती (घग्घर) नदी के तट पर 4500 वर्ष पहले बसा हुआ था। कालीबंगा में जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं जो संसार से प्राचीनतम है। दीवारें ईंटो से बनती थी और इन्हें मिट्टी के गारे से जोड़ा जाता था। कालीबंगा से भूकम्प आने के प्राचीनतम् प्रमाण मिले है।
Concept note सिन्धु के पूर्व के क्षेत्र अर्थात भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले लोगों को संदर्भित करने के लिए 6वीं – 5वीं शताब्दी बीसीई में पुराने फारसी शब्द ‘हिन्दू’ का उपयोग किया जाता था। सर्वप्रथम ईरानियों ने सिन्धु नदी के पूर्व में रहने वालों को ‘हिन्दू’ नाम दिया।
Concept note सामवेद से तात्पर्य है कि वह ग्रन्थ जिसके मन्त्र गाये जा सकते है और जो संगीतमयी हो। "साम" शब्द का अर्थ है 'गान'। सामवेद में संकलित मंत्रो को देवताओं की स्तुति के समय गाया जाता था। सामवेद में कुल 1549 ऋचायें है। जिनमें से 75 के अतिरिक्त शेष ऋग्वेद से ली गई है। इन ऋचाओं का गान सोमयज्ञ के समय उदगाता करते थे। ‘सामवेद’ की तीन महत्वपूर्ण शाखाएँ हैं– कौमुथ, जैमिनीय या तलवाकर एवम् राणायनीय।
Concept note पुरुष सूक्त ऋग्वेद संहिता के दसवें मण्डल का एक प्रमुख सूक्त है, जिसमें एक विराट पुरुष की चर्चा हुई है और उसके अंगो का वर्णन हुआ है। इसको वैदिक ईश्वर का स्वरूप मानते हैं।
Concept note वैदिक कालीन चतुराश्रम व्यवस्था के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों में बाँटा गया है। ये चार है - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास। छान्दोग्य उपनिषद में तीन आश्रमों का उल्लेख है परन्तु जबालोपनिषद में चारों आश्रमों का उल्लेख मिलता है। गृहस्थ आश्रम - इस समय मनुष्य को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह चरण 25 वर्ष से शुरू होता है और 50 वर्ष तक रहता है। गृहस्थ व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ मनुष्य को अपने पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों दोनों को सन्तुलित करना होता है।
Concept note भारत में पहली शताब्दी से पूर्व 6 प्रमुख आस्तिक एवं 3 प्रमुख नास्तिक दार्शनिक मतों का प्रतिपादन हो चुका था। आस्तिक मत को षडदर्शन सिद्धांत कहते है जिसमें सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांशा और वेदांत शामिल है। सांख्य दर्शन के प्रर्वतक कपिल मुनि थे। इस दर्शन को भारत का प्राचीनतम दर्शन माना जाता है। इस दर्शन में प्रकृति को प्रथम तत्व माना गया है। दर्शन - प्रर्वतक योग - महर्षि पतंजलि न्याय - महर्षि गौतम वैशेषिक - महर्षि कणाद मीमांसा - आचार्य जैमिनी वेदांत - महर्षि बादरायण
Concept note ऋग्वेद - यह प्राचीनतम वैदिक ग्रंथ है, इसकी रचना सप्त सैंधव प्रदेश में हुई थी। इसमें 10 मण्डल, 1028 श्लोक और लगभग 10462 मंत्र है। 10वें मण्डल में पुरुषसूक्त का उल्लेख है, जिसमें चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र) का उल्लेख है।
Concept note उपवेद वेदों से सम्बन्धित माने जाते हैं ये चार हैं।– आयुर्वेद, गन्धर्व वेद, धनुर्वेद और शिल्पवेद। आयुर्वेद ऋग्वेद का उपवेद है इसमें चिकित्सा सम्बन्धी ज्ञान का वर्णन है।
Concept note ऋग्वेद में ऋषि विश्वमित्र और देवी के रूप में पूजी जाने वाली दो नदियों के बीच संवाद के रूप में एक भजन है। ये नदियाँ व्यास और सतलुज हैं।
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