Concept note वेदों के अर्थ को अच्छी तरह से समझने में वेदांग काफी सहायक होते हैं। वेदांगों की कुल संख्या 6 है, जो इस प्रकार है- शिक्षा,कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष। वैदिक स्वरों के शुद्ध उच्चारण के लिए शिक्षा शास्त्र की रचना की गई, कल्प का अर्थ है कर्मकाण्ड अर्थात् विधिनियम, व्याकरण का कार्य भाषा को वैज्ञानिक शैली प्रदान करना है। निरुक्त का अर्थ है व्युत्पत्ति शास्त्र, छन्द पद्यों को चरणों में सूत्रबद्ध करने के लिए इसकी स्थापना की गयी।
Concept note मौर्य शासन के उत्थान के पहले की दो सदियों में मगध साम्राज्य के विकास का दौर समकालीन ईरानी साम्राज्य के दौर के समान रहा है। मगध में बिंबिसार, अजातशत्रु और महापदमनंद जैसे महात्वाकांक्षी शासकों ने लगातार इसके विस्तार से इसे मजबूत किया। मगध के निकट लोहे भंडारों की उपस्थिति के कारण मगध की भौगोलिक स्थित लौह युग में उपयुक्त थी। साक्ष्य यह साबित करते हैं कि वैदिक काल के बाद मगध भारत का पहला साम्राज्य है, जिसमें युद्ध के लिए बड़े पैमाने पर हाथियों का उपयोग किया जाता था।
Concept note गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक ग्राम पर हुआ था। गौतम बुद्ध के जीवनकाल के दौरान छठीं एवं सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में भारत में 16 महान शक्तियाँ (महाजनपद) अस्तित्व में थे जो निम्नवत् हैं- महाजनपद राजधानी → 1. वत्स कौशाम्बी → 2. काशी वाराणसी → 3. अंग चम्पा → 4. मगध गिरिव्रज (राजगृह) → 5. वज्जि वैशाली/मिथिला/ विदेह → 6. कोशल श्रावस्ती → 7. अवन्ति उज्जैन/महिष्मती → 8. मल्ल कुशावती/कुशीनारा → 9. पांचाल अहिच्छत्र/कांपिल्य → 10. चेदि शक्तिमती/सूक्तिवती → 11. कुरू इंद्रप्रस्थ → 12. मत्स्य विराटनगर → 13. गान्धार तक्षशिला → 14. अश्मक पोटन/पोटली (द. भारत में) → 15. शूरसेन मथुरा → 16. कम्बोज हाटक/राजपुर
Concept note महाजनपद काल में वज्जि (वैशाली) व मल्ल (कुशावती) संघ थे ऐसे राज्यों का शासन राजा द्वारा न होकर गण/संघ द्वारा होता था, जबकि महाजनपद राजाओं द्वारा शासित होते थे परन्तु कुछ में अलग प्रकार की शासन व्यवस्था थी।
Concept note बौद्ध ग्रन्थ अगुंत्तर निकाय एवं जैन ग्रन्थ भगवती सूत्र में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। महाजनपद - राजधानी कोशल - श्रावस्ती/अयोध्या कुरु - इन्द्रप्रस्थ वज्जि - विदेह एवं मिथिला गांधार - तक्षशिला
Concept note बौद्ध ग्रन्थ अगुंत्तर निकाय तथा जैन ग्रन्थ भगवतीसूत्र में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। जबकि सुत्त पिटक में बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएं (जातक कथाएं) वर्णित है तथा बौद्ध धर्म के उपदेश संगृहीत है। विनयपिटक में भिक्षु और भिक्षुणियों के संघ एवं दैनिक जीवन सम्बन्धी आचार-विचार, नियम संगृहीत है। अभिधम्म पिटक में बौद्ध दार्शनिक सिद्धान्तों का वर्णन है। यह प्रश्नोत्तर के रूप में है।
Concept note प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) बिहार में स्थित थी। मगध साम्राज्य के अंतर्गत आधुनिक बिहार के पटना, गया व शाहाबाद जिले के क्षेत्र सम्मिलित थे। सोलह महाजनपदों में से एक मगध साम्राज्य के रूप में आविर्भाव हर्यक वंश के शासन के साथ हुआ। इसके बाद शिशुनाग वंश व नन्द वंश का शासन हुआ। मगध के शक्तिशाली शासकों में बिम्बिसार, अजातशत्रु, उदयिन, कालाशोक एवं महापद्मनंद माने जाते हैं।
Concept note प्राचीन भारत में महाजनपदों के शासक अपने क्षेत्र के किसानों से ‘भागा’ नामक कर एकत्र करते थे। उस समय कृषि मुख्य व्यवसाय था। आमतौर पर जो उत्पादन किया जाता था, उसका १/६ हिस्सा कर के रूप में वसूला जाता था।
Concept note नन्दवंश का अन्तिम शासक घनानन्द था यह सिकन्दर का समकालीन था। चाणक्य की मदद से चन्द्रगुप्त मौर्य ने इसे युद्ध में पराजित किया और मगध पर एक नये राजवंश मौर्य वंश (322 ई. पू.– 184 ई. पू.) की स्थापना की। चन्द्रगुप्त मौर्य मगध की राजगद्दी पर 322 ई. पूर्व में बैठा। चन्द्रगुप्त मौर्य ने 305 ई. पूर्व में सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया था। चन्द्रगुप्त मौर्य जैन धर्म का अनुयायी था। हर्यक वंश - ५४४ ई. पू. – ४१२ ई. पू. शिशुनाग वंश - ४१२ ई. पूर्व – ३४४ ई. पू. नन्द वंश - ३४४ ई. पू. – ३२४ ई. पू. मौर्यवंश - ३२२ ई. पू. – १८४ ई. पू.
Concept note बिम्बिसार (544 ईसा पूर्व – 492 ईसा पूर्व) ने मगध में हर्यंक वंश की स्थापना की। उसने अंग राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया यही विस्तार ‘आगे चलकर’ मौर्य साम्राज्य के विस्तार का भी आधार बना। पुराणों के अनुसार बिंबिसार को श्रेणिक कहा गया है। बिंबिसार ने मगध के यश और सम्मान को वैवाहिक संधियों और विजयों के माध्यम से काफी बढ़ाया। उसकी एक रानी कोशल के राजा प्रसेनजित की बहन थी। मौर्य राजवंश–मौर्य राजवंश (322–184 ईसा पूर्व) प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं महान राजवंश था इसने 137 वर्ष तक भारत में राज्य किया। इसकी स्थापना का श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मंत्री कौटिल्य को जाता है। शुंग वंश–शुंग वंश प्राचीन भारत का एक शासकीय वंश था जिसने मौर्य वंश के बाद शासन किया। इसका शासन उत्तर भारत में 184 ई.पू. से 75 ई. पू. तक यानि 109 वर्षों तक रहा। नंद वंश–प्राचीन भारत का एक राजवंश था जिसने पाँचवीं–चौथी शताब्दी ईसा पूर्व उत्तरी भारत के विशाल भाग पर शासन किया।
Concept note हर्यंक वंश का संस्थापक बिम्बिसार मगध की गद्दी पर 544 ई. पू. में बैठा था। वह बौद्ध धर्म का अनुयायी था। बिम्बिसार ने गिरिव्रज (राजगृह) का निर्माण कर उसे अपनी राजधानी बनाया तथा इसने मगध पर 52 वर्षों तक शासन किया था। बिम्बिसार की हत्या उसके ही पुत्र अजातशत्रु ने कर दी तथा 492 ई. पू. में मगध की गद्दी पर बैठा।
Concept note नंद वंश का संस्थापक महापद्मनंद था। पुराणों में महापद्मनंद को सर्वक्षत्रांतक (क्षत्रियों का नाश करने वाला) तथा भार्गव (परशुराम का अवतार) कहा गया है उसने ‘एकराट’ और ‘एकच्छत्र’ की उपाधि धारण की। महापद्मनंद के आठ पुत्रों में घनानंद नंद वंश का अंतिम शासक था। इसी के समय सिकन्दर (325 ई.पू.) ने पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण किया था। ग्रीक लेखकों ने घनानंद को ‘अग्रमीज’ कहा है। 322 ई.पू. में चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु चाणक्य की सहायता से घनानंद की हत्या कर मौर्यवंश के शासन की नीव डाली।
Concept note हर्यंक वंश का शासक अजातशत्रु, बिम्बिसार का पुत्र था। अजातशत्रु 492 ई. पू. में अपने पिता बिम्बिसार की हत्या करके गद्दी पर बैठा। अजातशत्रु का उपनाम कुणिक था तथा प्रारम्भ में वह जैन धर्म का अनुयायी था परन्तु बाद में इसने बौद्ध धर्म अपना लिया। इसने राजगृह में स्तूपों का निर्माण करवाया और 483 ई. पू. राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया।
Concept note हर्यक वंश का संस्थापक बिम्बिसार मगध की राजगद्दी पर 544 ई.पू. (बौद्ध ग्रंथों के अनुसार) में बैठा था। प्रसिद्ध चिकित्सक जीवक मगध के सम्राट बिम्बिसार के राजवैद्य थे। महात्मा बुद्ध की सेवा में बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य ‘जीवक’ को भेजा था। इसके अतिरिक्त जब अवन्ति प्रदेश के राजा प्रद्योत पाण्डु रोग से ग्रसित थे तब भी बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को उनकी सेवा सुश्रुषा के लिए भेजा था। जीवक 7 वर्ष तक तक्षशिला में चिकित्सा शास्त्र का अध्ययन किया था। जीवक राजगृह की गणिका सालवती का पुत्र था लोक लाज के कारण उसकी माँ उसे राजगृह की गलियों में फेंक दिया था। जीवक को बिम्बिसार के पुत्र अभय ने शिक्षण हेतु तक्षशिक्षा भेजा वह बालरोग तथा शल्य चिकित्सा का विशेषज्ञ था। उसकी फीस 16000 कर्षापण थी। ऐसा माना जाता है कि बिम्बिसार का पुत्र अभय वैशाली की गणिका आम्रपाली का पुत्र था।
Concept note धनानंद नंद वंश का अन्तिम शासक था। यूनानी लेखकों ने इसे ‘अग्रमीज’ या ‘जैन्ड्रमीज’ कहा है। महापद्मनंद मगध साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली शासक था। इसने पहली बार कलिंग की विजय की तथा वहाँ एक नहर भी खुदवाई, जिसका उल्लेख कलिंग शासक खारवेल ने अपने हाथीगुम्फा अभिलेख में किया है। व्याकरणाचार्य पाणिनि इसके मित्र थे।
Concept note नंद राजवंश का संस्थापक महापद्मनंद था। पुराणों में इसे सर्वक्षत्रान्तक (क्षत्रियों का नाश करने वाला) तथा भार्गव (दूसरे परशुराम का अवतार) कहा गया है। इसनें एकराट् और एकछत्र की उपाधि धारण की। ध्यातव्य है कि महापद्म नंद का पुत्र घनानंद सिकन्दर का समकालीन था तथा चन्द्रगुप्त मौर्य ने घनानदं की हत्या कर मौर्य वंश की स्थापना की थी। नंद शासक जैन मत के पोषक थे। धनानंद के जैन अमात्य शक्टाल तथा स्थूलभद्र थे।
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