Concept note महापरिनिर्वाण से पहले बुद्ध ने अन्तिम उपदेश वैशाली में दिया था। कुशीनगर में रामाभर स्तूप का निर्माण बुद्ध की राख के एक हिस्से के साथ किया गया था; जहाँ उनका दाह संस्कार हुआ था।
Concept note गौतम बुद्ध शाक्य गणराज्य के निवासी थे। शाक्य गणराज्य बौद्ध काल में उत्तर प्रदेश के पूर्वोत्तर भाग तथा नेपाल के तराई वाले भाग में स्थित था। कपिलवस्तु इसकी राजधानी थी। गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन शाक्य गणराज्य के गणमुख्य थे। शाक्य गण से सम्बन्धित होने के कारण ही इनका वंश शाक्य वंश कहलाया। शाक या सागौन वृक्षों की अधिकता के कारण ही इस गणतंत्र का नाम शाक्य गणतंत्र पड़ा।
Concept note कुषाण वंश के शासक कनिष्क के शासनकाल के दौरान चतुर्थ बौद्ध संगीत का आयोजन कश्मीर के कुण्डलवन में हुआ। इसके अध्यक्ष वसुमित्र एवं उपाध्यक्ष अश्वघोष थे। इसी संगीति में बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायो हीनयान एवं महायान में विभाजित हुआ। ध्यातव्य है कि जिन अनुयायियों ने बिना किसी परिवर्तन के बुद्ध के मूल उपदेशों को स्वीकार किया वे हीनयानी कहलाये, ये लोग रूढ़िवादी व निम्नमार्गी थे एवं बुद्ध को महापुरुष मानते थे और भगवान के रूप में उनकी पूजा नही करते थे। बौद्ध धर्म के कठोर तथा परपंरागत नियमों मे परिवर्तन करने वाले महायानी कहलाये।
Concept note बुद्ध की मृत्यु के बाद उनके शरीर (अस्थिअवशेष) को आठ भागों में विभाजित किया गया तथा प्रत्येक भाग पर स्तूप बनवाये गये। अत:स्तूप इनकी मृत्यु से संबंधित है। ध्यातव्य है कि 483 ई. पू. में 80 वर्ष की अवस्था में कुशीनगर में बुद्ध की मृत्यु हो गयी। इस घटना को बौद्ध ग्रन्थों में ‘महापरिनिर्वाण’ की संज्ञा दी गयी। जबकि 29 वर्ष की अवस्था में जब इन्होंने गृह त्याग किया तो इसे ‘महाभिनिष्क्रमण’ कहा गया है।
Concept note तीन भागो में विभाजित त्रिपिटक (विनयपिटक, सुत्तपिटक, अभिधम्मपिटक) बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रन्थ है। त्रिपिटक में महात्मा बुद्ध के बुद्धत्व (ज्ञान) प्राप्त करने से लेकर महापरिनिर्वाण तक दिये हुए प्रवचनों का संकलन किया गया है। सुत्तपिटक में बुद्ध के उपदेश तथा विचार मिलते हैं, विनयपिटक में बौद्ध संघ के नियम एवं विधान है तथा अभिधम्मपिटक में बौद्ध दर्शन की जानकारी मिलती है। यह पालि भाषा में लिखा गया है जबकि हिन्दुओं का प्रमुख ग्रन्थ-गीता जैनों का आगम तथा पारसीयों का जिन्द अवेस्ता है।
Concept note महाबोधि मन्दिर समूह या महाबोधि विहार, बोध गया में स्थित प्रसिद्ध बौद्ध विहार है। भगवान बुद्ध ने यही पर ज्ञान प्राप्त किया और दुनिया में अपने दिव्य ज्ञान का प्रसार किया। जातक कथाओं में उल्लेखित बोधि वृक्ष भी यहां है। यह मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनावाया गया था। यूनेस्को द्वारा 2002 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया।
Concept note बुद्ध ने अपने उपदेश पालि भाषा में दिया था। यह शिक्षित समुदाय की भाषा होने के साथ राजभाषा थी। यह भाषा मूलत: मागधी भाषा ही थी, इसके उदाहरण कच्चायन-व्याकरण में देखने को मिलते हैं। डॉ. ओल्डनबर्ग और ई. मूलर का मत है कि पालि भाषा का उद्गम स्थान कलिंग है।
Concept note प्राचीन बौद्ध साहित्य को त्रिपिटक कहा जाता है। जो सुत्तपिटक, विनयपिटक, अभिधम्म पिटक के नाम से जाने जाते है। सुत्तपिटक में बौद्ध धर्म के सिद्धान्त शिक्षाएं तथा उपदेश संग्रहित हैं। इसे बौद्ध धर्म का एनसाइक्लोपीडिया कहा जाता है। त्रिपिटकों में यह सबसे बड़ा व श्रेष्ठतम है। सुत्तपिटक के पाँच निकाय हैं। (1) दिघ्घनिकाय (2) मञ्जिम निकाय (3) संयुक्त निकाय (4) अंगुत्तर निकाय (5) खुद्दक निकाय
Concept note बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे इनका जन्म 563 ईसा पूर्व कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। चतुर्थ बौद्ध संगीति के बाद बौद्ध धर्म दो भागों हीनयान और महायान में विभाजित हो गया था।
Concept note महावस्तु एक महत्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथ है, इसे भगवान बुद्ध के जीवन को केन्द्र बनाकर छठी शताब्दी ईसा पूर्व के इतिहास को प्रस्तुत किया गया है। हीनयान स्कूल का मुख्य उद्देश्य ‘महावस्तु’ के आधार पर शिक्षा देना है, ध्यातव्य है कि गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में कपिलवस्तु के लुम्बिनी ग्राम में हुआ था। बौद्ध धर्म के तीन रत्न है- बुद्ध, धम्म व संघ।
Concept note बुद्ध को गौतम बुद्ध ‘महात्मा बुद्ध’ आदि नामों से जाना जाता है। इनका जन्म 563 ई.पू. लुम्बिनी नामक गाँव में हुआ था। गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनकी मृत्यु कुशीनगर के मल्ल गणराज्य में हुई थी।
Concept note ‘चार आर्य सत्य की अवधारणा बौद्ध धर्म से सम्बन्धित है। चार आर्य सत्य निम्नलिखित हैं- दु:ख – जीवन में दु:ख है। दु:ख समुदाय – दु:ख का कारण है। दु:ख निरोध – दु:ख से छुटकारा है। दुख निरोध – दु:ख से छुटकारा पाने का उपाय है। गामिनी प्रतिपदा
Concept note वैशाली बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है यह अत्यन्त प्राचीन नगर है, जिसका महात्मा बुद्ध से निकट सम्बन्ध रहा है, यह गंगा घाटी का नगर है जो आज के बिहार एवं बंगाल-प्रान्त के बीच सुशोभित है, इसका दूसरा नाम विशाल भी था। इसकी स्थापना महातेजस्वी विशाल नामक राजा ने की थी। जो भारतीय परम्परा के अनुसार इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए थे। इसकी पहचान मुजफ्फरपुर जिले में स्थित आधुनिक बसाढ़ से की जाती है यहाँ की प्रशासनिक भाषा मैथिली व हिन्दी थी। बुद्ध के समय में तथा उनसे पूर्व लिच्छवी गणराज्य की राजधानी यहाँ थी। नालंदा– भारतीय इतिहास नालंदा एक शैक्षिक राज्य के रूप में वर्णित है। दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शैक्षिक योग्यताओं के कारण प्रसिद्ध था। इसकी स्थापना 5वीं शताब्दी में हुई थी। भगवान बुद्ध के बार-बार यहाँ आने से इसका विशेष महत्त्व है।
Concept note महात्मा बुद्ध से जुड़े आठ स्थान लुम्बिनी, गया, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, संकिशा, राजगृह और वैशाली को बौद्ध ग्रंथो में अष्टमहास्थान के नाम से जाना गया। अत: दिये गये विकल्पों में से रायगढ़ अष्टमहास्थान से संबंधित नहीं है।
Concept note चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन कुषाण सम्राट कनिष्क के शासनकाल में हुई। यह संगीति कश्मीर के कुण्डलवन में आयोजित की गई थी इस संगीति के अध्यक्ष वसुमित्र एवं उपाध्यक्ष अश्वघोष थे। इस संगीति में बौद्ध धर्म दो शाखाओं हीनयान और महायान में विभाजित हो गया। इस सभा में महासंघिकों का बोलबाला था तथा इसी संगीति में विभाषाशास्त्र नामक एक अन्य ग्रंथ की रचना हुई। इसी समय में बौद्धों ने संस्कृत के रूप में भाषा को अपना लिया। (Shaivism/Vaishnavism)
Concept note नटराज शिवजी का एक अन्य नाम है। नटराज शिव का स्वरूप न सिर्फ उनके सम्पूर्ण काल एवं स्थान को दर्शाता है, अपितु यह बिना किसी संशय स्थापित करता है कि ब्रह्माण्ड में स्थित सारा जीवन, उनकी गति कम्पन्न तथा ब्रह्माण्ड से परे शून्य की नि:शब्दता सभी कुछ एक शिव में निहित है। नटराज दो शब्दों के समावेश से बना है। नट (अर्थात् कला) और राज। इस स्वरूप में शिव कलाओं के आधार हैं। शिव का तांडव नृत्य प्रसिद्ध है।
Concept note त्रिमूर्ति के अंतर्गत गुप्तकाल में ब्रह्मा, विष्णु, और महेश (शिव) की पूजा आरंभ हुई। धार्मिक समन्वय की यह उदार भावना गुप्तकाल की विशेषता थी। गुप्त सम्राट वैष्णव धर्म के अनुयायी थे किन्तु उनकी धार्मिक सहिष्णुता की भावना से शैव धर्म एवं ब्रह्मा की पूजा में भी समान प्रगति हुई। वर्तमान समय में विष्णु एवं शिव की पूजा समाज में विशेष रूप से प्रचलित है परन्तु ब्रह्मा जी की पूजा उपेक्षित है। ब्रह्मा जी का मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है।
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