Concept note छठी शताब्दी ईसापूर्व में मगध उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण शक्तिशाली राज्य था। चौथी शताब्दी ई.पू. के समय मगध में नंदवंश के शासक घनानंद का शासन था। मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने राजनीतिक गुरू चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से धनानंद को पराजित कर मौर्य वंश की नींव डाली। कौटिल्य द्वारा लिखित ‘अर्थशास्त्र’ से मौर्य प्रशासन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है।
Concept note भारत आने वाला प्रथम विदेशी यात्री मेगस्थनीज था। मेगस्थनीज यूनान का एक राजदूत था जो चन्द्रगुप्त के दरबार में आया था। इसने अपनी पुस्तक इण्डिका में मौर्ययुगीन समाज एवं संस्कृति के विषय में लिखा है।
Concept note बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक महान हुआ जो 269 ई.पू. में मगध की राजगद्दी पर बैठा, इससे पहले वह अवन्ती का राज्यपाल था, मास्की व गुर्जरा अभिलेख में अशोक का नाम अशोक मिला, पुराणों के अनुसार अशोक को अशोकवर्धन कहा गया है। अशोक अपने राज्याभिषेक के आठवें वर्ष लगभग 261 ई.पू. में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया। टालमी द्वितीय ने पाटलिपुत्र में डायानोसियस नामक एक राजदूत को अशोक के दरबार में भेजा था, अशोक को उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी। अशोक बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा था, भारत में शिलालेखों का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने किया तथा अपना संदेश जनता तक पहुँचाने की कोशिश की, इनके ज्यादातर अभिलेख प्राकृत एवं ब्राह्मी लिपि में है।
Concept note अशोक (बिन्दुसार का पुत्र) महान के द्वारा अपने शासन की सुदृढ़ता को आम जन मानस तक पहुँचाने के लिये सार्वजनिक स्थानों पर अपनी राजाज्ञाएँ स्थापित करवायी। अशोक के शिलालेख पत्थर, खम्भे, पत्थर की पहिया आदि पर वर्णित किये गये। कर्नाटक के रायचूर जिले से प्राप्त शिलालेख में अशोक को देवताओं के प्रिय (देवानाप्रिय एवं प्रियदर्शी) नाम से सम्बोधित किया गया है। ध्यातव्य है कि सर्वप्रथम 1837 ई0 में जेम्स प्रिंसेप ने अशोक के दिल्ली टोपरा अभिलेख को पढ़ने में सफलता पायी जबकि सबसे पहले 1750 ई0 में टीफेन्थैलर द्वारा खोजा गया अभिलेख दिल्ली मेरठ अभिलेख था।
Concept note बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक महान सम्राट हुआ, जो 269 ईसा पूर्व में मगध की राजगद्दी पर बैठा। अशोक पहला शासक था जिसने अपनी प्रजा और अधिकारियों के लिए अपना संदेश पत्थर की सतहों, प्राकृतिक चट्टानों और पॉलिश किए गये स्तंभों पर उत्कीर्ण किया था। अशोक के शिलालेखों की संख्या 14 है, इस शिलालेख पर वर्णित अभिलेख को पढ़ने में सबसे पहली सफलता (1873 में) जेम्स प्रिंसेप को मिली।
Concept note वर्तमान ओडिशा राज्य का अधिकांश भाग प्राचीन काल में कलिंग नाम से प्रसिद्ध था। खारवेल महामेघवाहन वंश का शासक था। कलिंग पर इसी का शासन था। राजा खारवेल जैनधर्म का संरक्षक था। हाथीगुंफा अभिलेख में खारवेल के वंश का नाम चेदि है। इस अभिलेख में नंदवंशीय शासक महापदमनंद द्वारा कलिंग में नहर खुदवाए जाने का उल्लेख है।
Concept note यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त मौर्य को एक संन्धि के तहत एरिया, अराकोसिया, जैड्रोशिया एवं पेरीपेनिसदाई क्षेत्र चन्द्रगुप्त को सौपें एवं मेगस्थनीज को अपने राजदूत के रूप में चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा। ध्यातव्य है कि मेगस्थनीज द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक ‘इण्डिका’ है। मेगस्थनीज के ग्रंथ इण्डिका से चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रशासन की जानकारी प्राप्त होती है। हालाँकि यह ग्रन्थ अपने मूल रूप में उपलब्ध नहीं है, फिर भी इसके उद्धरण अनेक यूनानी लेखकों एरियन, स्ट्रैबो, प्लूटार्क, प्लिनी, जस्टिन एवं डायोडोरस आदि के उद्धरणों में प्राप्त होते हैं। इण्डिका एक अन्य यूनानी लेखक एरियन की भी कृति मानी जाती है।
Concept note शासक बनने के बाद सम्राट अशोक ने एकमात्र युद्ध कलिंग के साथ आखिरी युद्ध लड़ा। कलिंग वर्तमान में महानदी एवं गोदावरी के पूर्वी तट पर स्थित है जिसका अधिकतम क्षेत्र उड़ीसा के अन्तर्गत आता है। रोमिला थापर का कहना है कि अशोक की नजर कलिंग के समृद्ध व्यापार पर थी। इस युद्ध का उल्लेख 13वें शिलालेख में किया गया है। कलिंग युद्ध अशोक के राज्याभिषेक के 8 वर्ष बाद 261 ई.पू. में हुआ। इस युद्ध में भीषण रक्तपात एवं हृदयविदारक दृश्य देखकर अशोक ने अपनी विजय नीति बदली। अशोक विजय घोष के स्थान पर धम्म विजय एवं धम्म घोष की नीति अपनाई। इस युद्ध का वर्णन अशोक के तेरहवें शिलालेख में मिलता है।
Concept note जौगड़, ओडिशा के गंजाम जिले में अवस्थित है। यहाँ से अशोक का चतुर्दश शिलालेख प्राप्त हुआ है जिसमें अशोक द्वारा कलिंग की प्रजा के प्रति पुत्रवत् व्यवहार करने का आदेश दिया गया है। इसकी खोज 1850 ई. में वाल्टर इलियट ने किया था।
Concept note चन्द्रगुप्त मौर्य ने नंदवंश के शासक घनानंद को पराजित कर मौर्य वंश की स्थापना की। चन्द्रगुप्त मौर्य 322 ई. पू. में मगध की गद्दी पर बैठा। चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैनी गुरु भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा ली थी। इसका प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) था, जिसने राजनीति से सम्बन्धित पुस्तक ‘‘अर्थशास्त्र’’ लिखी। सेल्यूकस निकेटर का राजदूत मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था, जिसने ‘‘इंडिका’’ नामक पुस्तक लिखी। चन्द्रगुप्त मौर्य ने 298 ई. पू. श्रवणबेलगोला में सल्लेखना (जैन विधि द्वारा उपवास) विधि द्वारा अपने प्राण को त्याग दिया।
Concept note मौर्य वंश के संस्थापक तथा भारतीय सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 340 ई. पू. बिहार में हुआ था। चन्द्रगुप्त पूरे भारत को एक साम्राज्य के अधीन लाने में सफल रहे। इनका शासन काल 322 ई.पू. से 298 ई. पू. तक माना जाता है। अपने जीवन के अन्तिम दिनों में चन्द्रगुप्त, स्वामी भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा लेकर उसके साथ ही श्रवणबेलगोला चले गये एवं चंद्रगिरी पहाड़ पर रहने लगे।
Concept note बिन्दुसार मौर्य वंश का शासक था। यह चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। जो 298 ईसा पूर्व में मगध की राजगद्दी पर बैठा। यह आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था। इसे शत्रु विनाशक के नाम से भी जाना जाता हैं। जैन ग्रंथों में बिन्दुसार को सिंहसेन कहा गया हैं। बिंदुसार ने सीरिया के शासक एण्टियोकस प्रथम से मदिरा, सूखे अंजीर एवं एक दार्शनिक की मांग की थी। डाइमेकस सीरिया के शासक एण्टियोकस प्रथम का राजदूत था जो बिन्दुसार के दरबार में आया था। बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक था।
Concept note सम्राट अशोक मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक ने ईसा पूर्व 273 ई. पू. से 232 ई. पू. तक उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश से पश्चिम में अफगानिस्तान, ईरान तक सम्पूर्ण भारत पर शासन किया था। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से कुशल प्रशासक तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भी जाना जाता है। सम्राट अशोक ने संपूर्ण एशिया में तथा अन्य महाद्वीपों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया। सम्राट अशोक के शासन की जानकारी उनके द्वारा लगवाए गए विभिन्न स्तंभ एवं शिलालेखो से मिलती है।
Concept note चन्द्रगुप्त मौर्य जिस पाटलिपुत्र में पैदा हुए थे उस पाटलिपुत्र को अब पटना के नाम से जाना जाता है। पटना, भारत में बिहार प्रान्त की राजधानी है। हर्यंक वंशीय शासक उदयिन ने पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) की स्थापना की थी।
Concept note सांची मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन जिले में बेतवा नदी के तट पर स्थित हैं। यह बौद्ध स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। मौर्य सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष (261 ई. पू.) में कल्ािंग पर आक्रमण किया। कलिंग युद्ध में हुई क्षति तथा नरसंहार से उसका मन अपने कृत्यों को लेकर व्यथित हो उठा। इसके बाद अशोक ने बौर्द्ध धर्म अपना लिया। सांची का महान मुख्य स्तूप अशोक ने तीसरी शदी ई. पू. में बनवाया था। इसके केन्द्र में अर्द्धगोलाकार निर्मित ढॉचे में बुद्ध के अवशेष रखे गये थे।
Concept note कलिंग के युद्ध के पश्चात अशोक ने बौद्धधर्म को स्वीकार किया। अशोक अपने भाई सुसीम के पुत्र न्यग्रोथ के वचन सुनकर बौद्ध धर्म की ओर आकर्षित हुआ और उपगुप्त के द्वारा बौद्ध धर्म में दीक्षित किया गया। अशोक ने राज्याभिषेक के दसवें वर्ष के पश्चात बोधगया तथा 21वें वर्ष लुम्बिनी की यात्रा की थी।
Concept note चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। यह मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री एवं गुरू थे। इनके द्वारा रचित ग्रन्थ ‘अर्थशास्त्र’ है जो एक राजनीति का ग्रंथ है।
Concept note उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें। १
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